Sunday, June 16, 2024
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कांग्रेस नहीं लड़ेगी उप चुनाव, किसको होगा फायदा?


लखनऊ: कांग्रेस पार्टी रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव में बैकफुट पर आ गई है। कांग्रेस कमेटी उत्तर प्रदेश की तरफ से जारी प्रेस नोट में बताया गया कि पार्टी रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनावों में अपने प्रत्याशी नहीं उतारेगी। 



आपको बता दें कि प्रेस नोट में कांग्रेस ने कहा कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी को मजबूत करने और पुनर्निर्माण के उद्देश्य से लोकसभा उपचुनाव में आजमगढ़ और रामपुर से प्रत्याशी नहीं उतारने का फैसला किया है। 

इससे पहले बीएसपी ने भी घोषणा की थी कि वह रामपुर से प्रत्याशी नहीं उतारेगी, लेकिन आजमगढ़ से चुनाव लड़ेगी। दोनों पार्टियों की घोषणा के बाद समझना जरूरी हो जाता है कि ऐसा करने के पीछे वजह क्या है और चुनाव न लड़ने से किसे फायदा मिलेगा?

कांग्रेस ने कहा-विधानसभा के नतीजों को देखकर लिया फैसला

कांग्रेस ने कहा कि विधानसभा के नतीजों को देखते हुए यह जरूरी है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस स्वयं का पुनर्निर्माण करे, जिससे कि 2024 के आम चुनाव में स्वयं को एक मजबूत विकल्प के रूप में पेश कर सके।

वहीं बसपा ने कहा था कि यूपी में आगामी 23 जून को होने वाले दो लोकसभा उप-चुनाव में से एक सीट को पूरी दमखम के साथ लड़ने का फैसला लिया है। वह सीट आजमगढ़ है। लेकिन दूसरी रामपुर लोकसभा सीट पर पार्टी यह उप-चुनाव नहीं लड़ेगी, क्योंकि इस सीट को अभी और मजबूत बनाने की जरूरत है, जिसे 2024 के लोकसभा चुनाव में जरूर लड़ा जाएगा। साथ ही इस सीट पर पार्टी किसी को भी अपना समर्थन नहीं देगी।

अब सवाल आता है कि आजमगढ़ में कांग्रेस वोटर कहां जा सकता है? अभी पार्टी ने किसी का समर्थन करने का ऐलान नहीं किया है। ऐसे में अगर पार्टी वोटर्स को फ्री छोड़ती है तो एसपी के अलावा बीएसपी और बीजेपी के साथ जाने से शायद ही परहेज करे। यानी किसी एक पार्टी को फायदा होता नहीं दिख रहा है। इस सीट से बीएसपी के मुस्लिम उम्मीदवार गुड्डू जमाली और बीजेपी ने यादव कार्ड खेलते हुए दिनेश लाल को टिकट दिया है।

यूपी विधानसभा चुनाव में बीएसपी पर बीजेपी की बी टीम होने का आरोप लगा था। कई सर्वे में ये बात सामने आई कि मायावती का कोर वोटर कहा जाने वाला जाटव समुदाय बीजेपी की तरफ शिफ्ट हुआ है। बीजेपी की सीट और वोट प्रतिशत बढ़ने में जाटव वोटर की बड़ी भूमिका रही। रामपुर में 13% एससी समुदाय के लोग हैं। अगर विधानसभा वाला ट्रेंड लोकसभा उपचुनाव में रिपीट हुआ तो मायावती के चुनाव न लड़ने से रामपुर सीट पर सीधा फायदा बीजेपी को हो सकता है।

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