Saturday, June 15, 2024
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बिलकिस बानो मामला: सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से कहा- दोषियों को फिर से जेल भेजा जाए

बिलकिस बानो मामले में 11 दोषियों की रिहाई के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं की सुनवाई में मंगलवार को अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट से अपील की है कि सभी दोषियों को फिर से जेल भेजा जाए।

सुप्रीम कोर्ट में गुजरात सरकार ने सोमवार को कैदियों की रिहाई के समर्थन में हलफनामा दिया था। गुजरात सरकार ने हलफनामे में कहा कि कैदियों की रिहाई में पूरी तरह कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया है।

याचिकाकर्ता सुभाषिनी अली और अन्य की ओर से पेश हुए कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अजय रस्तोगी और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच से कहा, ”मेरा मानना है कि उन्हें (11 दोषियों को) जेल में होना चाहिए।”

सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार के हलफनामे के बाद याचिकाकर्ताओं को अपना पक्ष रखने के लिए समय दिया है और इस मामले की अगली सुनवाई की तारीख 29 नवंबर दी है।

हलफ़नामे में गुजरात सरकार ने 11 सज़ायाफ़्ता मुजरिमों को रिहा करने के अपने फ़ैसले का बचाव किया है। सरकार ने कहा कि सभी दोषियों ने 14 साल या इससे अधिक समय जेल में बिताया और उनके अच्छे व्यवहार को देखते हुए रिहाई दी गई है। साथ ही ये फ़ैसला केंद्र सरकार की सहमति के बाद लिया गया था।

क्या है मामल?

साल 2002 में हुए गुजरात दंगों के दौरान अहमदाबाद के पास रनधिकपुर गांव में एक भीड़ ने पांच महीने की गर्भवती महिला बिलकिस बानो के साथ सामूहिक बलात्कार किया था। उनकी तीन साल की बेटी सालेहा की भी बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। 21 जनवरी, 2008 को मुंबई की एक विशेष सीबीआई अदालत ने बिलकिस बानो के साथ गैंगरेप और परिवार के सात सदस्यों की हत्या के आरोप में 11 अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उनकी सज़ा को बरकरार रखा था। 15 साल से अधिक की जेल की सज़ा काटने के बाद दोषियों में से एक राधेश्याम शाह ने सज़ा माफ़ी के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात सरकार को सज़ा माफ़ी के मुद्दे पर गौर करने का निर्देश दिया था।

इसके बाद गुजरात सरकार ने एक कमेटी का गठन किया। इस कमेटी ने मामले के सभी 11 दोषियों की सज़ा माफ़ करने के पक्ष में सर्वसम्मत फ़ैसला लिया और उन्हें रिहा करने की सिफ़ारिश की। आख़िरकार, 15 अगस्त को इस मामले में उम्रकै़द की सजा भुगत रहे 11 दोषियों को जेल से रिहा कर दिया गया।

गुजरात सरकार की माफ़ी नीति के तहत 15 अगस्त को जसवंत नाई, गोविंद नाई, शैलेश भट्ट, राधेश्याम शाह, विपिन चंद्र जोशी, केशरभाई वोहानिया, प्रदीप मोढ़डिया, बाकाभाई वोहानिया, राजूभाई सोनी, मितेश भट्ट और रमेश चांदना को गोधरा उप कारागर से छोड़ दिया गया।

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