Saturday, November 29, 2025
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मोदी की अध्यक्षता में रायपुर में डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन: आंतरिक सुरक्षा के नीति-निर्धारण पर मंथन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को रायपुर में पुलिस महानिदेशकों/महानिरीक्षकों के 60वें अखिल भारतीय सम्मेलन की अध्यक्षता की। यह तीन दिवसीय सम्मेलन भारतीय प्रबंधन संस्थान, रायपुर में आयोजित किया गया था। 28 नवंबर से शुरू हुए इस सम्मेलन के लिए प्रधानमंत्री शुक्रवार शाम लगभग 7:40 बजे रायपुर पहुँचे। मोदी के साथ, इस सम्मेलन में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, गृह राज्य मंत्री, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के पुलिस महानिदेशक और केंद्रीय पुलिस संगठनों के प्रमुख शामिल हुए। 
 

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एक आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, इस वर्ष सम्मेलन का विषय “विकसित भारत: सुरक्षा आयाम” है। सम्मेलन में वामपंथी उग्रवाद, आतंकवाद निरोध, आपदा प्रबंधन, महिला सुरक्षा और पुलिसिंग में फोरेंसिक विज्ञान एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता के उपयोग जैसे प्रमुख सुरक्षा मुद्दों पर विस्तृत विचार-विमर्श होगा। प्रधानमंत्री विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुलिस पदक भी प्रदान करेंगे। विज्ञप्ति में कहा गया है कि यह तीन दिवसीय सम्मेलन देश भर के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और सुरक्षा प्रशासकों को राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न मुद्दों पर खुले और सार्थक विचार-विमर्श के लिए एक महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि पिछले 40 वर्षों से देश के लिए नासूर बने तीन ‘हॉटस्पॉट’- नक्सलवाद, पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर की समस्या के निराकरण का मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है, और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे। अपने संबोधन में शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डीजीपी-आईजीपी सम्मेलन समस्याओं के समाधान, चुनौतियों और रणनीतियों पर चर्चा से आगे बढ़कर आंतरिक सुरक्षा के नीति-निर्धारण का प्रमुख मंच बन गया है। शाह ने कहा कि देश पिछले 40 वर्षों से नक्सलवाद की समस्या का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘देश के लिए नासूर बने तीन हॉटस्पॉट—नक्सलवाद, पूर्वोत्तर और जम्मू-कश्मीर की समस्या के निराकरण के लिए मोदी सरकार ने स्थायी समाधान दिया है और जल्द ही ये देश के बाकी हिस्सों जैसे बन जाएंगे।’’ 
 

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गृह मंत्री ने मोदी सरकार की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा, ‘‘राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) को सुदृढ़ बनाया गया, तीन नए आपराधिक कानूनों के साथ-साथ ‘नारकोटिक्स’ और भगोड़ों के खिलाफ भी मजबूत कानून बनाए गए हैं। तीनों नए आपराधिक कानूनों के पूरी तरह लागू होने के बाद भारत की पुलिसिंग दुनिया में सबसे आधुनिक हो जाएगी।’’ शाह ने नक्सलवाद के खिलाफ उठाए गए ठोस कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले सात वर्षों में 586 ‘फोर्टिफाइड’ पुलिस स्टेशन बनाकर सुरक्षा ढांचा मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि 2014 में नक्सल-प्रभावित जिलों की संख्या 126 थी, जो घटकर अब सिर्फ 11 रह गई है। 
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