अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपने मित्र और शोले तथा चुपके चुपके जैसी फिल्मों के सह-कलाकार धर्मेन्द्र के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए मंगलवार को कहा कि धर्मेन्द्र अपने शानदार करियर के दौरान एक ऐसे जगत में बेदाग रहे जिसने हर दशक में बदलाव देखा है।
धर्मेन्द्र (89) का लंबी बीमारी के बाद सोमवार को जुहू स्थित उनके घर पर निधन हो गया।
धर्मेन्द्र ने 1975 की क्लासिक फिल्म शोले में अमिताभ बच्चन के निभाए किरदार जय के साथ वीरू की प्रसिद्ध भूमिका निभाई थी और ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे गीत के माध्यम से परदे पर दोस्ती को परिभाषित किया था।
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उनके निधन पर बच्चन ने लिखा, …एक और साहसी दिग्गज हमें छोड़कर चले गए हैं… इस रंगमंच को छोड़कर… एक असहनीय ध्वनि के साथ सन्नाटा छोड़ गए हैं।
अमिताभ बच्चन अपने नाती अगस्त्य नंदा और बेटे अभिषेक बच्चन के साथ धर्मेन्द्र के अंतिम संस्कार में शामिल हुए। अगस्त्य ने आने वाली फिल्म इक्कीस में धर्मेन्द्र के बेटे की भूमिका निभाई, जो संभवतः दिवंगत अभिनेता की आखिरी फिल्म है।
अपने आधिकारिक ब्लॉग पोस्ट में बच्चन ने लिखा, धरम जी… महानता के प्रतीक थे, वह न केवल अपनी सुविख्यात शारीरिक उपस्थिति के लिए बल्कि अपने विशाल हृदय और उसकी सबसे प्यारी सादगी के लिए भी हमेशा याद आएंगे। वह अपने साथ पंजाब के उस गांव की मिट्टी की सौंधी खुशबू लाए थे जहां से वह आए थे और इसके प्रति हमेशा सच्चे बने रहे। एक ऐसी बिरादरी में वह अपने शानदार करियर के दौरान बेदाग रहे, जिसने हर दशक में बदलाव देखे। बिरादरी बदली… पर वह नहीं।
बच्चन ने कहा कि धर्मेन्द्र की मुस्कान, उनका आकर्षण और उनकी गर्मजोशी उनके आसपास आने वाले सभी लोगों पर छा जाती थी। बच्चन ने कहा कि इस तरह के गुण इस पेशे में दुर्लभ हैं।
अभिनेता ने लिखा, हमारे आस-पास का वातावरण खाली हो गया है… एक शून्य जो हमेशा खाली ही रहेगा… प्रार्थनाएं।
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पंजाब में 1935 में धरम सिंह देओल के रूप में पैदा हुए धर्मेंद्र का छह दशक लंबा उल्लेखनीय करियर रहा। उन्होंने 300 से अधिक फिल्मों में काम किया और “शोले”, “चुपके चुपके”, “सत्यकाम”, “अनुपमा”, “सीता और गीता” जैसी कई शानदार फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाई। धर्मेंद्र के परिवार में पत्नी प्रकाश कौर, हेमा मालिनी, बेटे सनी और बॉबी देओल, तथा बेटियां विजेता, अजीता, ईशा और आहना हैं। उन्हें वर्ष 2012 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया था। अभिनेता ने राजनीति में भी संक्षिप्त पारी खेली। उन्होंने 2004 में बीकानेर लोकसभा सीट से जीत दर्ज की थी, लेकिन एक ही कार्यकाल के बाद उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास ले लिया। धर्मेंद्र अंतिम समय तक सक्रिय रहे और प्रशंसक उन्हें श्रीराम राघवन निर्देशित फिल्म “इक्कीस” में आखिरी बार पर्दे पर देख सकेंगे।

