Saturday, November 29, 2025
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श्रीसांवलियाजी सेठ मंदिर में रिकॉर्ड 51 करोड़ से अधिक चढ़ावा, भक्तों की अभूतपूर्व आस्था का प्रतीक

चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध कृष्णधाम श्रीसांवलियाजी सेठ मंदिर में इस बार भंडार खुलने के बाद जिस तरह दान की गिनती सामने आई, उसने सभी पुराने रिकॉर्ड पीछे छोड़ दिए। मंदिर में उमड़े अपार श्रद्धालुओं के प्रेम और विश्वास का असर इस बार चढ़ावे की ऐतिहासिक राशि में साफ देखा गया, जो नकद, ऑनलाइन और धातुओं को मिलाकर 51 करोड़ 27 लाख रुपए से अधिक पहुंच गई है।
मौजूद जानकारी के अनुसार भंडार की गिनती 19 नवंबर से शुरू हुई थी और लगातार छह चरणों में इसे पूरा किया गया। बता दें कि प्रशासन, मंदिर ट्रस्ट और सुरक्षा कर्मियों की निगरानी में नोटों, सिक्कों और पर्चियों की गिनती का काम कई दिनों तक चलता रहा। इस दौरान मंदिर परिसर में हमेशा श्रद्धालुओं की भीड़ रही, जो अपने आराध्य सांवलिया सेठ के प्रति गहरी भक्ति व्यक्त करते दिखाई दिए।
गौरतलब है कि इस बार सिर्फ नकदी ही नहीं, बल्कि कीमती धातुओं के रूप में भी बड़ा दान मिला है। भंडार और भेंट कक्ष से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार कुल 207 किलो 793 ग्राम से अधिक चांदी और 1204 ग्राम से अधिक सोना भक्तों द्वारा अर्पित किया गया है। यह दर्शाता है कि भक्त अपनी आस्था को हर रूप में व्यक्त करने में पीछे नहीं रहे हैं।
छह चरणों की गिनती के दौरान हर चरण में करोड़ों की राशि निकलती रही। पहले दिन 12 करोड़ से अधिक, दूसरे चरण में 8.54 करोड़, तीसरे में 7.08 करोड़, चौथे में 8.15 करोड़, पांचवें में 4.19 करोड़ और अंतिम चरण में 41 लाख रुपए से अधिक राशि मिलने के बाद कुल चढ़ावा 51 करोड़ की सीमा पार कर गया। यह पहली बार है जब श्रीसांवलियाजी सेठ मंदिर में दान की राशि इतनी ऊंचाई तक गई है, जिससे मंदिर प्रशासन और स्थानीय लोगों में विशेष उत्साह देखा जा रहा है।
इस बार भंडार खुलने को लेकर श्रद्धालुओं में पहले ही भारी उत्साह था, और अब दान की यह ऐतिहासिक गिनती भक्तों की आस्था का जीवंत प्रमाण बन गई है। मेवाड़ क्षेत्र में सांवलिया सेठ को लेकर जिस तरह की भावनात्मक लगन और गहरी मान्यता है, वह इस चढ़ावे में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, जिसके चलते मंदिर ने एक बार फिर इतिहास रच दिया है।
इतिहास में दर्ज यह रिकॉर्ड चढ़ावा बताता है कि भक्तों का विश्वास हर वर्ष और मजबूत हो रहा है और यही भावनाएं इस पवित्र स्थल की महिमा को निरंतर बढ़ाती रही हैं। यही कारण है कि इस वर्ष का दान सांवलिया सेठ के प्रति लोगों की अटूट आस्था का अद्भुत उदाहरण बन गया है।
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