आज से छह दिन या फिर लगभग 150 घंटे कह सकते हैं। तब तक पूरी दुनिया की नजर सिर्फ हिंदुस्तान पर टिकी होगी और हिंदुस्तान से चिढ़ने वाले मुल्कों की नींद उड़ी होगी। बिल्कुल साफ तौर पर क्योंकि 150 घंटे के बाद भारत के सबसे करीबी दोस्त यानी कि रूस के राष्ट्रपति पुतिन भारत आने वाले हैं। इतिहास गवाह है कि जबजब मोदी और पुतिन मिले हैं। बहुत कुछ बड़ा हुआ है और इस बार भी कुछ ऐसा ही होने की उम्मीद जताई जा रही है। अमेरिका, चीन और पाकिस्तान की सांसे सूखी रहेंगी। क्योंकि 6 दिन बाद यानी 5 दिसंबर को पुतिन भारत आ रहे हैं। दिल्ली में रूस और भारत की दोस्ती का नया चैप्टर लिखा जाएगा और एक बार फिर कुछ ऐसी तस्वीरें दुनिया देखेगी। इस बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के न्योते पर रूसी राष्ट्रपति व्लादमीर पुतिन 4 और 5 दिसंबर को भारत में होंगे।
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भारत रूस वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए। जब रूसी राष्ट्रपति यहां पहुंचेंगे उनका औपचारिक स्वागत किया। पुतिन और प्रधानमंत्री मोदी के बीच में बैठक भी होगी और राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू भी उनका स्वागत करेंगी। यह सारी औपचारिकताएं होंगी लेकिन रणनीतिक रूप से और कूटनीतिक रूप से यह मुलाकात पुतिन की ये विजिट दोनों देशों के लिए बहुत महत्वपूर्ण रहने वाली है। दिसंबर के दो दिन अमेरिका चीन और पाकिस्तान के लिए क्यों टेंशन देने वाले हैं? यह आपको आगे बताएंगे। लेकिन उससे पहले आपके लिए यह जानना जरूरी है कि पुतिन की दो दिनों की यात्रा भारत के लिए क्यों अहम है। एस400 एयर डिफेंस सिस्टम की डील इसमें भारत रूस के बीच पांच और एस400 यूनिट की डील हो सकती है। भारत पहले ही 2018 में पांच S400 यूनिट खरीदने का समझौता कर चुका है। जिसमें से तीन यूनिट मिल चुकी हैं।
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भारत को पांचवी पीढ़ी के लड़ाकू विमानों की जरूरत है और शिखर सम्मेलन के दौरान सुई 57 के भारत में सह उत्पादन की शर्त पर खरीदने का निर्णय हो सकता है। इसके अलावा रूस अपने औद्योगिक क्षेत्र में 10 लाख भारतीय कुशल श्रमिकों की भर्ती करेगा। इसके लिए श्रमिकों की आवाजाही सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बात होगी। बैठक में लंबी अवधि के ऊर्जा एग्रीमेंट पर चर्चा हो सकती है। पुतिन के दौरे को लेकर दिल्ली स्थित रूसी दूतावास ने कहा कि इस दौरान, दोनों देशों के बीच राजनीति, व्यापार, इकॉनमी, साइंस, टेक्नॉलजी, संस्कृति और मानवीय सहयोग को लेकर चर्चा होगी। पूतिन के इस दौरे में दोनों देशों के बीच एक मोबिलिटी करार पर भी सहमति बन सकती है।
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इसमें माइग्रेशन को लेकर एक फ्रेमवर्क और रूस में भारत के कार्यकुशल कार्यबल को विस्तार देने जैसी बातें शामिल हो | सकती हैं। यूं तो पूतिन के भारत दौरे को लेकर इस साल के शुरुआत से ही इस अटकलें लग रही थी, लेकिन उनके कार्यक्रम को लेकर स्पष्टता अगस्त में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल के मॉस्को दौरे के दौरान आई, जहां डोभाल ने कहा था कि उनके दौरे को लेकर तारीखें अब तय हो गई हैं। बीते दिनों यूएनजीए की बैठक में रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने प्रस्तावित दौरे को लेकर जानकारी दी थी।

