प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को गुरु तेग बहादुर को उनके 350वें शहीदी दिवस पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी दिवस पर हम उनके अद्वितीय साहस और बलिदान को नमन करते हैं।’’
उन्होंने कहा, ‘‘आस्था और मानवता की रक्षा के लिए उनकी शहादत हमारे समाज को सदैव आलोकित करेगी।’’
एक अप्रैल, 1621 को अमृतसर के गुरु के महल में जन्मे तेग बहादुर, गुरु हरगोबिंद के सबसे छोटे पुत्र और नौवें सिख गुरु थे। 24 नवंबर, 1675 को दिल्ली में मुगल बादशाह औरंगजेब के आदेश पर उनका सिर कलम कर दिया गया था।
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इससे पहले केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को नौवें सिख गुरु, गुरु तेग बहादुर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उन्होंने अपने धर्म की रक्षा के लिए अपने प्राण न्योछावर करने में संकोच नहीं किया। शाह ने यहां लाल किले में नौवें सिख गुरु की 350वीं शहीदी दिवस के उपलक्ष्य दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित एक समारोह में हिस्सा लिया। लाल किले के नजदीक 10 नवंबर को हुए विस्फोट के बाद 17वीं सदी के इस स्मारक पर यह पहला बड़ा कार्यक्रम था।
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इस विस्फोट में 15 लोगों की जान चली गई थी। केंद्रीय गृह मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘गुरु तेग बहादुर जी ने अन्याय और अधर्म का जिस साहस और शौर्य के साथ सामना किया, वह हर भारतीय के लिए प्रेरणा का केंद्र है। धर्म की रक्षा के लिए वे अपने प्राणों को आहूत करने से भी पीछे नहीं हटे। उनका जीवन भारत की आध्यात्मिक चेतना, साहस और बलिदान की अमर गाथा है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘(प्रधानमंत्री नरेन्द्र) मोदी जी ने निर्णय किया है कि पूरा देश कृतज्ञ भाव से गुरु साहिब का 350वां बलिदान दिवस मना कर स्वधर्म और संस्कृति के प्रति उनके समर्पण का स्मरण करेगा।’’ शाह ने कहा, ‘‘आज दिल्ली में गुरु तेग बहादुर जी के बलिदान को नमन कर मत्था टेका। गुरु तेग बहादुर जी के त्याग, साहस और बलिदान की गाथाएं अनंत काल तक हमें प्रेरणा देती रहेंगी।’’ गुरु तेग बहादुर की 350वीं शहीदी दिवस के उपलक्ष्य में लाल किले में तीन दिवसीय कार्यक्रम रविवार को शुरू हुआ।

