Monday, June 24, 2024
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Deen Dayal Upadhyay jayanti: जिन्हें कहते थे गरीब-दलितों की आवाज, पढ़ें उनके बारे में खास बातें

माता रामप्यारी और पिता भगवती प्रसाद उपाध्याय के घर 25 सितम्बर 1916 को मथुरा जिले के "नगला चन्द्रभान" ग्राम में जन्मे पं दीनदयाल उपाध्याय हम सबके प्रेरणास्रोत और मातृभूमि के सच्चे उपासक थे। भारत के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले पं दीनदयाल उपाध्याय कुशल संगठक, बौद्धिक चिंतक और भारत निर्माण के स्वप्नदृष्टा के रूप में आज तलक कालजयी हैं। उन्होंने व्यक्ति, परिवार, समाज और राष्ट्र के विकास का समूचा दर्शन दिया।

अपनी संस्कृति, संस्कारों, परंपराओं, जीवन मूल्यों के आधार पर देश निर्माण का विचार देने वाले पंडित दीन दयाल उपाध्याय की आज जयंती है। विश्व के विकास और कल्याण की सभी संभावनाएं उनके द्वारा दिए गए एकात्म मानव दर्शन में है। पं दीनदयाल उपाध्याय का एकात्म मानव दर्शन भारतीय चिंतन की दो अवधारणा पर आधारित है।

पहली वसुधैव कुटुंबकम् का सिद्धांत और दूसरी चार पुरुषार्थ। उन्होंने शरीर, मन, बुद्धि और आत्मा की आवश्यकता की पूर्ति के लिए उसके विकास के लिए चार पुरुषार्थ की अवधारणा को स्पष्ट किया। उनका मानना था कि व्यक्ति में प्रतिभा भी है और उसकी आवश्यकताएं भी है लेकिन उसका मन व्यापक होता है। वह भ्रमित हो सकता है। मनुष्य सकारात्मक दिशा में बड़े इसके लिए मन का संतुलन और अनुशासन जरूरी है। यह बुद्धि और विवेक से ही संभव है। इसके लिए चार पुरुषार्थ आवश्यक है इनमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का समावेश है। यदि चार पुरुषार्थ की मर्यादा में व्यक्ति को उसके विकास के सभी अवसर प्रदान किए जाए तो संसार इस श्रेष्ठ स्वरूप को प्राप्त कर सकता है इसकी कल्पना वेदों में है। यह पूर्ण यानी एकात्म मानव की कल्पना है जिसे पंडित दीनदयाल जी ने एकात्म मानव दर्शन के रूप में दिया। जो सारे जगत में अलौकिक है।

1916 में हुआ था जन्म 
पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्म 25 सितम्बर 1916 को हुआ था। पिता का नाम भगवती प्रसाद उपाध्याय और माता का नाम रामप्यारी था। हालांकि, जब वह 08 साल के ही थे तो उनकी माता-पिता दोनों का ही निधन हो गया। इसके बाद उनके मामा ने उनका ध्यान रखा।  अपनी शिक्षा के दौरान ही वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सम्पर्क में आए। वह आगे चलकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के विचारक और भारतीय जन संघ (BJS) के सह-संस्थापक भी बनें। 

दीनदयाल उपाध्याय जनसंघ के राष्ट्रजीवन दर्शन के निर्माता माने जाते हैं। उनका उद्देश्य स्वतंत्रता की पुनर्रचना के प्रयासों के लिए विशुद्ध भारतीय तत्व-दृष्टि प्रदान करना था। उन्होंने भारत की सनातन विचारधारा को युगानुकूल रूप में प्रस्तुत करते हुए एकात्म मानववाद की विचारधारा दी। उनका विचार था कि आर्थिक विकास का मुख्य उद्देश्य सामान्य मानव का सुख होना चाहिए। उनका कहना था कि ‘भारत में रहने वाला, इसके प्रति ममत्व की भावना रखने वाला मानव समूह एक जन हैं। उनकी जीवन प्रणाली, कला, साहित्य, दर्शन सब भारतीय संस्कृति है। इसलिए भारतीय राष्ट्रवाद का आधार यह संस्कृति है। इस संस्कृति में निष्ठा रहे तभी भारत एकात्म रहेगा।

क्या है अंत्योदय दिवस?
अंत्योदय शब्द का मतलब उत्थान है, जो समाज में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोगों के उत्थान को समर्पित है। इस दिन का उद्देश्य भारत के गरीब और पिछड़े लोगों के विकास की ओर ध्यान खींचना है। साथ ही इस दिन समाज और राजनीति में उपाध्याय के योगदान के लिए याद करने के लिए भी मनाया जाता है।

कैसे शुरू हुआ अंत्योदय दिवस?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 सितंबर 2014 को पंडित दीनदयाल उपाध्याय की 98वीं जयंती के अवसर पर ‘अंत्योदय दिवस’ की घोषणा की गई थी, जिसे 25 सितंबर 2015 से आधिकारिक तौर पर हर साल मनाया जा रहा है। बता दें कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने ही सबसे पहले अंत्योदय का नारा दिया था।

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