Saturday, November 29, 2025
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Rare Earth से Railway व Metro तक, Modi Cabinet के फैसलों से भारत की सामरिक क्षमता में भारी वृद्धि

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने आज कई अहम फैसले लिए। इनमें सबसे महत्वपूर्ण फैसला है 7,280 करोड़ रुपये की Rare Earth Permanent Magnets (REPM) Scheme को मंजूरी, जिसके तहत देश में पहली बार 6,000 MTPA क्षमता वाले एकीकृत रेयर अर्थ मैग्नेट उत्पादन संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। इसके अलावा, महाराष्ट्र व गुजरात में दो रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग परियोजनाओं (कुल 224 किमी) को स्वीकृति दी गयी है, जो माल व यात्री दोनों मोर्चों पर रणनीतिक कनेक्टिविटी को बढ़ाएंगी। साथ ही, पुणे मेट्रो फेज-2 की लाइन 4 और 4A (31.6 किमी, 9,857 करोड़ रुपये लागत) को हरी झंडी दी गयी है, जिससे तेजी से बढ़ते पुणे महानगर में टिकाऊ, हरित और बहु-माध्यमीय शहरी परिवहन का नया ढांचा तैयार होगा। इन निर्णयों का साझा महत्व यह है कि ये भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता, लॉजिस्टिक क्षमता, ऊर्जा परिवर्तन और भविष्य की अर्थव्यवस्था के बुनियादी अवसंरचना, चारों को समान रूप से मजबूत करते हैं।
देखा जाये तो केंद्रीय मंत्रिमंडल के आज के फैसले सिर्फ सामान्य प्रशासनिक स्वीकृतियाँ नहीं हैं, ये भारत की 21वीं सदी की रणनीतिक दिशा को परिभाषित करने वाले मील के पत्थर हैं। रेयर अर्थ मैग्नेट निर्माण, रेलवे नेटवर्क विस्तार और पुणे मेट्रो का विस्तार, ये तीनों निर्णय अपनी-अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, पर इनका संयुक्त संदेश है कि भारत अब सिर्फ उपभोक्ता अर्थव्यवस्था नहीं, बल्कि वैश्विक उत्पादन, प्रौद्योगिकी और लॉजिस्टिक्स का एक उदित होता महाशक्ति बनने की राह पर है।

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रेयर अर्थ मैग्नेट मुद्दे पर सरकार का निर्णय तकनीकी संप्रभुता की ओर निर्णायक कदम है। दुनिया की बैटरियों, इलेक्ट्रिक मोटर्स, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम, रडार, विंड टर्बाइनों आदि लगभग हर उभरती तकनीक के बीच में Rare Earth Permanent Magnets धड़कते दिल की तरह काम करते हैं। दशकों से भारत इस क्षेत्र में लगभग पूर्ण आयात-निर्भरता की शर्मनाक स्थिति में रहा है, जबकि चीन इस बाजार का 90% से अधिक हिस्सा नियंत्रित करता है। ऐसे में 7,280 करोड़ रुपये की REPM योजना का संदेश स्पष्ट है कि भारत अब तकनीकी सप्लाई-चेन का मोहरा नहीं, खिलाड़ी बनना चाहता है।
इस योजना की सबसे बड़ी ताकत उसकी वैल्यू-चेन अप्रोच है। ऑक्साइड से लेकर धातु, धातु से मिश्रधातु और अंततः तैयार मैग्नेट तक, पूरी कड़ी भारत में बनेगी। यह सिर्फ उत्पादन क्षमता नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजिकल डीप कैपेबिलिटी का निर्माण है। 2030 तक REPM की घरेलू मांग दोगुनी होने वाली है; ऐसे में यह कदम न सिर्फ आत्मनिर्भरता बल्कि निर्यात-क्षमता की दिशा में भी मोड़ बदलने वाला है। Net-Zero 2070 और EV क्रांति के लिए यह रणनीतिक अनिवार्यता भी है।
इस फैसले का सामरिक महत्व रक्षा एवं अंतरिक्ष उद्योग में भी दिखेगा। भारत अपने एयरोस्पेस प्लेटफॉर्म, क्वांटम सेंसर, हाइपरसोनिक प्लेटफॉर्म और उन्नत हथियार प्रणालियों के लिए अब वैश्विक बाजार पर निर्भरता घटा सकेगा। यह सुरक्षा संप्रभुता का प्रश्न है और भारत पहली बार इसे गंभीरता से सुलझा रहा है।
इसके अलावा, रेलवे मल्टी-ट्रैकिंग संबंधी फैसला लॉजिस्टिक बैकबोन का अपग्रेड है। महाराष्ट्र और गुजरात में 224 किमी नेटवर्क विस्तार भले कागज़ पर छोटा दिखे, लेकिन यह भारत की आर्थिक धड़कन यानि पश्चिमी कॉरिडोर के लिए निर्णायक है। मुंबई महानगर क्षेत्र से लेकर सौराष्ट्र के तटीय पट्टी तक, यह क्षेत्र निर्यात, पेट्रोलियम, कंटेनर, कोयला और कृषि वस्तुओं का प्रमुख ट्रांजिट रूट है। इन मार्गों पर नई लाइनों का अर्थ है- माल ढुलाई की क्षमता में तेज वृद्धि, भीड़भाड़ में कमी, सबर्बन व लंबी दूरी यात्री गाड़ियों की समयबद्धता में सुधार, CO₂ उत्सर्जन में भारी कमी और तेल आयात में कटौती। भारत की लॉजिस्टिक कॉस्ट, जो GDP की 14% तक जाती है, उसे घटाने की दिशा में यह महत्वपूर्ण कदम है। PM Gati Shakti मैपिंग और मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी इस परियोजना को सिर्फ ट्रैक-एडिशन नहीं, बल्कि आर्थिक दक्षता सुधार का एक बड़ा औजार बनाती है।
वहीं पुणे मेट्रो फेज-2 को मंजूरी भविष्य के शहरी भारत का खाका है। पुणे भारत का नया ज्ञान-केंद्र है— IT, R&D, ऑटो-इंजीनियरिंग, स्टार्टअप्स और उच्च शिक्षा का संगम। लेकिन ट्रैफिक बोझ ने इस शहर को लगभग घुटनों पर ला दिया है। लाइन 4 और 4A सिर्फ मेट्रो लाइनें नहीं, बल्कि शहरी उत्पादकता बचाने की आपात आवश्यकता हैं। पाँच वर्षों में पूरा होने वाला 9,857 करोड़ रुपये का यह निवेश पूर्व-पश्चिम एवं दक्षिण-पश्चिम गलियारों को जोड़कर, IT पार्कों से आवासीय और औद्योगिक केंद्रों तक निर्बाध कनेक्टिविटी प्रदान कर, 2058 तक लगभग 12 लाख प्रतिदिन यात्री क्षमता वाली प्रणाली तैयार कर शहर की आर्थिक रफ्तार को स्थिर रखेगा। यह शहरी भारत की एक बड़ी समस्या यानि “अनियोजित विस्तार” का समाधान करेगा।
बहरहाल, मोदी मंत्रिमंडल के आज के फैसले एक दिशा यानि Viksit Bharat 2047 के लिए काफी अहम हैं। आज का दिन तीन नीतिगत निर्णयों का नहीं, बल्कि भारत की दीर्घकालिक रणनीतिक सोच की पुनर्पुष्टि का दिन है। REPM से भारत भविष्य की टेक्नोलॉजी युद्धभूमि में अपनी जगह बनाएगा। रेलवे परियोजनाएँ भारत को एक तेज, सस्ती और पर्यावरण-अनुकूल अर्थव्यवस्था की ओर ले जाएँगी। वहीं पुणे मेट्रो 21वीं सदी के शहरी भारत का आधुनिक चेहरा तय करेगी। ये फैसले बताते हैं कि भारत अब प्रतिक्रियात्मक नहीं, प्रोएक्टिव दूरदृष्टि से संचालित राष्ट्र-निर्माण की राह पर है। Viksit Bharat @2047 की आकांक्षा के पीछे अब ठोस, संरचनात्मक और दीर्घकालिक नीति-इंजीनियरिंग दिखाई देने लगी है।
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