Monday, June 24, 2024
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Sedition Law Update – राजद्रोह कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, अब दर्ज नहीं हो सकेंगी नई FIR, जुलाई में होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार तक इसका इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही कोर्ट ने ये भी कहा कि केंद्र हो या राज्य सरकार, 124A के तहत कोई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी।

नई दिल्ली, 11 मई : सुप्रीम कोर्ट में राजद्रोह कानून की वैधता को लेकर चल रही सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल (एसजी) तुषार मेहता ने कहा कि वह पुलिस को देशद्रोह (Sedition Law Case) के प्रावधान के तहत संज्ञेय अपराध दर्ज करने से नहीं रोक सकते हैं लेकिन एक सक्षम अधिकारी (एसपी रैंक) की संस्तुति के बाद ही 124 A के मामले दर्ज किए जाएं। उन्होंने आगे कहा कि लंबित राजद्रोह के मामलों की समीक्षा की जा सकती है। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने राजद्रोह कानून के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अब कोई नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। मामले की अगली सुनवाई जुलाई में होगी।


सभी पक्षों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में राजद्रोह कानून पर रोक लगा दी है। अब कोई नई एफआईआर दर्ज नहीं की जाएगी। साथ ही कोर्ट ने कहा कि जो पहले से ही इस कानून की वजह से जेल में हैं, उन्हें राहत के लिए अदालतों का दरवाजा खटखटाने को कहा है। साथ ही कोर्ट ने केंद्र सरकार को देशद्रोह कानून धारा 124 A पर पुनर्विचार करने की इजाजत दे दी है।

पुनर्विचार खत्म होने तक दर्ज न हो FIR: कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कानून के इस प्रावधान का उपयोग तब तक करना उचित नहीं होगा जब तक कि पुनर्विचार समाप्त नहीं हो जाता। कोर्ट ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि केंद्र और राज्य 124 A के तहत किसी भी एफआईआर को दर्ज करने से रोक देगा। कोर्ट ने आगे कहा ऐसे मामलों के दर्ज होने पर आरोपी को राहत के लिए कोर्ट में जाने की स्वतंत्रता होगी और कोर्ट जल्दी इसका निपटारा करेगा। सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे हफ्ते में होगी।

सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने इससे पहले सुनवाई के दौरान कहा कि एसपी रैंक के अधिकारी ही मामले को दर्ज कर सकेंगे। साथ ही उन्होंने आगे कहा कि लंबित राजद्रोह के मामलों की समीक्षा की जा सकती है। 124 A के तहत दर्ज मामलों में से कई मामलों में जल्द से जल्द जमानत देने पर विचार किया जा सकता है।

हालांकि इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील कपिल सिब्बल ने इसका विरोध किया। उन्होंने याचिका पर सुनवाई की मांग की। सिब्बल ने एक बार फिर कहा कि इसे सरकार पर नहीं छोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने इस कानून पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि इस कानून पर तत्काल रोक लगाए जाने की जरूरत है। इस बीच सॉलिसिटर जनरल के प्रस्ताव पर विचार करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की 3 जजों की बेंच थोड़ी देर के लिए उठी और फिर अपना फैसला सुना दिया।

राजद्रोह केस में कितने लोग जेल में?

शीर्ष अदालत ने कल मंगलवार को केंद्र सरकार को जवाब देने के लिए 24 घंटे का समय दिया था। ये समय इसलिए दिया गया है कि केंद्र सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस बात निर्देश देगी कि जब तक IPC की धारा 124 ए की समीक्षा की जा रही है, तब तक इसके तहत दर्ज केस पर रोक लगाई जाए। सॉलिसिटर जनरल ने सुनवाई के दौरान कहा कि सरकार कानून को लेकर पुनर्विचार के दौरान क्या कर सकती है। इस पर सरकार से निर्देश लेकर कोर्ट को सूचित किया जाएगा।

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस एनवी रमण सुनवाई के दौरान पूछा कि राजद्रोह मामले में कितने लोग अभी जेल में हैं। कपिल सिब्बल ने कहा कि करीब 800 लोग राजद्रोह मामले में जेल में हैं।

धारा 124 A पर रोक लगाने का केंद्र का विरोध

केंद्र ने आईपीसी की धारा 124 A पर रोक लगाने का विरोध किया है। प्रस्ताव है कि भविष्य में आईपीसी की धारा 124A के तहत प्राथमिकी पुलिस अधीक्षक द्वारा जांच के बाद ही दर्ज की जाएगी। जहां तक ​​लंबित मामलों का संबंध है तो अदालतों को जमानत पर शीघ्रता से विचार करने का निर्देश दिया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले कल मंगलवार को केंद्र से कहा था कि राजद्रोह के संबंध में औपनिवेशिक युग के कानून पर किसी उपयुक्त मंच द्वारा पुनर्विचार किए जाने तक नागरिकों के हितों की सुरक्षा के मुद्दे पर वह अपने विचारों से अवगत कराए। कोर्ट ने इस बात पर सहमति जताई कि इस प्रावधान पर पुनर्विचार केंद्र पर छोड़ दिया जाए जिसने इस संबंध में एक हलफनामा दायर किया है।

पूर्व कानून मंत्री ने देशद्रोह कानून पर रोक का किया स्वागत
पूर्व कानून मंत्री अश्विनी कुमार ने बुधवार को देशद्रोह कानून को रोकने के सुप्रीम कोर्ट के “ऐतिहासिक आदेश” का स्वागत किया, और केंद्र और राज्यों से इसके तहत कोई भी प्राथमिकी दर्ज करने से परहेज करने का आग्रह किया।
कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश न केवल सही है बल्कि देश की संवेदनशीलता के अनुरूप भी है। कुमार ने कहा, “औपनिवेशिक युग के कानून के घोर और खुलेआम दुरुपयोग के खिलाफ सही आदेश दिया गया है। सरकार द्वारा समीक्षा प्रक्रिया पूरी होने तक कानून के संचालन और कार्यान्वयन को स्थगित रखने का एकमात्र तरीका है।”

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