Thursday, June 20, 2024
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देश का एक ऐसा थाना जहां थानेदार की कुर्सी पर बैठने से खुद घबराता है थानेदार!, जानें क्या है वजह?

देश का एक ऐसा पुलिस स्टेशन है जहां आज तक कोई अधिकारी थानेदार की कुर्सी पर बैठने की हिम्मत नही जुटा पाया है। यहां तक कि इस थाने में अब तक तैनात खुद थाना इंचार्ज भी अपनी आधिकारिक कुर्सी के बगल में कुर्सी लगाकर अपना कार्य करते हैं।

जी हां, उत्तर प्रदेश के वाराणसी के एक थाने में थानेदार की कुर्सी पर बाबा काल भैरव अपना आसन पिछले कई सालों से जमाए हुए हैं। अफसर बगल में कुर्सी लगाकर बैठते हैं। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस पुलिस स्टेशन पर कोई भी IAS, IPS निरीक्षण के लिए नहीं आता।

क्यों अपनी कुर्सी पर नहीं बैठते थानेदार ?

वाराणसी के विश्वेश्वर गंज स्थित कोतवाली पुलिस स्टेशन के प्रभारी का कहना है कि ये परंपरा पिछले कई सालों से चली आ रही है। यहां कोई भी थानेदार जब तैनाती में आया तो वो अपनी कुर्सी पर नहीं बैठा। कोतवाल की कुर्सी पर हमेशा काशी के कोतवाल बाबा काल भैरव विराजते हैं। लोक मान्यता है कि आने-जाने वालों पर बाबा खुद नजर रखते हैं और इसी वजह से भैरव बाबा को काशी का कोतवाल भी कहा जाता है। यहाँ भैरव बाबा की इतनी महत्ता है कि पुलिस भी उनकी पूजा किए बिना कोई काम शुरु नही करती। माना जाता है कि खुद बाबा विश्वनाथ ने पूरी काशी नगरी के लेखा-जोखा का जिम्मा काल भैरव बाबा को दे रखा है। यहाँ तक कि बाबा की अनुमति के बगैर कोई भी व्यक्ति शहर में दाखिल नहीं हो सकता है।

पिछले 18 सालों से तैनात एक कॉन्स्टेबल का कहना है कि उसने अभी तक किसी भी थानेदार को अपनी कुर्सी पर बैठते नहीं देखा। बगल में कुर्सी लगाकर ही प्रभारी निरीक्षक बैठता है। हालांकि, इस परंपरा की शुरुआत कब और किसने की, ये कोई नहीं जानता। लोगों का ऐसा मानना है कि यह परंपरा कई सालों पुरानी ही है।

बाबा की मान्यता

माना जाता है कि साल 1715 में बाजीराव पेशवा ने काल भैरव मंदिर बनवाया था। यहां आने वाला हर बड़ा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सबसे पहले बाबा के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेता है। बता दें कि काल भैरव मंदिर में हर दिन 4 बार आरती होती है। जिसमें रात के समय होने वाली आरती सबसे प्रमुख होती हैं। आरती से पहले बाबा को स्नान कराकर उनका श्रृंगार किया जाता है। खास बात यह है कि आरती के समय पुजारी के अलावा मंदिर के अंदर किसी को जाने की इजाजत नहीं होती। बाबा को सरसों का तेल चढ़ता है। साथ ही एक अखंड दीप बाबा के पास हमेशा जलता रहता है।

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