Saturday, November 29, 2025
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Vishwakhabram: Zelensky बोले- हम पीछे नहीं हटेंगे, Putin ने दिया जवाब- बेटा हम आगे बढ़कर इलाका ले लेंगे

रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा है कि अमेरिका का संशोधित शांति-प्रस्ताव भविष्य में यूक्रेन संघर्ष के समाधान का आधार बन सकता है लेकिन यह केवल तभी होगा जब यूक्रेन अपनी सेना को उन क्षेत्रों से हटा ले, जिन्हें रूस अपना इलाक़ा मानता है। पुतिन ने चेतावनी दी कि यदि यूक्रेन ऐसा नहीं करता, तो रूस बलपूर्वक इन क्षेत्रों पर कब्ज़ा कर लेगा। यह बयान ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन, मॉस्को और कीव दोनों से बातचीत कर एक नया शांति-खाका तैयार करने की कोशिश कर रहा है। हम आपको बता दें कि लगभग चार साल से चल रहे इस युद्ध में यूक्रेनी सेना पूर्वी मोर्चे पर संख्या और संसाधनों दोनों में पिछड़ रही है।
किर्गिज़स्तान की यात्रा के दौरान पुतिन ने कहा— “यदि यूक्रेनी सेना उन क्षेत्रों से हट जाती है, तो हम लड़ाई रोक देंगे। यदि नहीं हटे, तो हम सैन्य कार्रवाई से उसे हासिल करेंगे।” देखा जाये तो रूस वर्तमान में यूक्रेन के लगभग पाँचवे हिस्से पर नियंत्रण बनाए हुए है, जबकि कीव लगातार कहता रहा है कि वह कोई भी ज़मीन नहीं छोड़ेगा।

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हम आपको बता दें कि अमेरिका का पहला प्रस्ताव काफी विवादित था क्योंकि इसमें यूक्रेन से डोनेट्स्क और कुछ अन्य क्षेत्रों से पीछे हटने की अपेक्षा की गई थी, जिससे डोनेट्स्क, क्रीमिया और लुहान्स्क पर रूस का दावा स्वीकार करने जैसा प्रभाव पड़ता था। यूरोप और यूक्रेन की तीखी आलोचना के बाद अमेरिका ने प्रस्ताव को छोटा और संशोधित किया। इस नए मसौदे को पुतिन एक “संभावित आधार” कह रहे हैं, हालांकि वह अब भी कब्ज़ाए गए क्षेत्रों की अंतरराष्ट्रीय मान्यता की मांग पर अड़े हुए हैं।
दूसरी ओर, यूक्रेन ने इसे तुरंत खारिज कर दिया। राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की के शीर्ष सलाहकार एंड्री यरमाक ने स्पष्ट कहा— “ज़ेलेंस्की के रहते कोई भी हमसे ज़मीन छोड़ने की उम्मीद न करे। वह किसी भी हाल में ऐसा समझौता नहीं करेंगे।” यूक्रेन की राय में फिलहाल वास्तविक बातचीत का आधार सिर्फ मौजूदा 1100 किलोमीटर लंबी फ्रंटलाइन को परिभाषित करना हो सकता है। बताया जा रहा है कि अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ़ अगले सप्ताह मॉस्को जाएंगे, जबकि अमेरिकी मंत्री डैन ड्रिस्कॉल इस सप्ताह कीव का दौरा करेंगे।
ज़मीनी हालात को देखें तो आपको बता दें कि डोनेट्स्क क्षेत्र का पोक्रोव्स्क शहर, जिसे रूस क्रास्नोआर्मेयस्क कहता है, भीषण संघर्ष का केंद्र बना हुआ है। पुतिन का दावा है कि रूसी सेना ने पोक्रोव्स्क और पास के मिर्नोग्राद (दिमित्रोव) को घेर लिया है। उन्होंने कहा कि रूस 70% पोक्रोव्स्क पर नियंत्रण कर चुका है और यूक्रेन की सबसे सक्षम इकाइयाँ भारी नुकसान झेल रही हैं। हालाँकि यूक्रेन के शीर्ष सेनापति ओलेक्ज़ांद्र सिरस्की ने इन दावों का खंडन किया है। उनके अनुसार यूक्रेनी सैनिक लगातार रूसी हमलों को रोक रहे हैं और शहर के केंद्र में संघर्ष जारी है। हम आपको यह भी बता दें कि दोनों पक्षों के दावों की स्वतंत्र पुष्टि संभव नहीं है साथ ही दोनों की जारी किये गये सैन्य मानचित्रों में भी विरोधाभास है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने यह भी कहा है कि जिन 28 बिंदुओं पर अमेरिका और यूक्रेन ने जिनेवा में चर्चा कर मसौदा तैयार किया था, उन्हें अब चार हिस्सों में विभाजित कर रूस को भेजा गया है। रूस का कहना है कि यह मसौदा आगे बढ़ने का आधार हो सकता है, लेकिन अंतिम समझौता तभी संभव है जब विश्व समुदाय यूक्रेन में रूस के कब्ज़े वाले क्षेत्रों को मान्यता दे। पुतिन का यह भी दावा है कि वे यूक्रेन की मौजूदा सरकार को “अवैध” मानते हैं, इसीलिए कीव से सीधा समझौता कानूनी रूप से संभव नहीं है और इसलिए किसी भी समझौते का अंतरराष्ट्रीय वैधता हासिल करना ज़रूरी है।
दूसरी ओर, राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने कहा है कि यूक्रेन और अमेरिका की टीम इस सप्ताह फिर बैठेगी ताकि जिनेवा में बनी रूपरेखा को आगे बढ़ाया जा सके। अगले सप्ताह वो खुद भी वार्ता में शामिल होंगे। उन्होंने कहा, “यूक्रेन मज़बूती से खड़ा रहेगा। हमारा रास्ता शांति और सुरक्षा की ओर ही होगा।”
देखा जाये तो यूक्रेन युद्ध अपने चौथे वर्ष में प्रवेश कर चुका है और अब यह केवल सैन्य संघर्ष नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक धुरी के पुनर्गठन की लड़ाई बन गया है। पुतिन के नवीनतम बयान से यह साफ है कि रूस अब खुलकर दो समानांतर रणनीतियाँ चला रहा है— एक युद्धभूमि पर सैन्य दबाव बढ़ाने की और दूसरी अंतरराष्ट्रीय मंच पर “संशोधित शांति की इच्छा” का प्रदर्शन करने की। रूस की यह स्थिति उसे नैतिक जिम्मेदारी से मुक्त दिखाने की कोशिश करती है। जैसे कि वह तो शांति चाहता है, पर यूक्रेन रास्ते में बाधा डाल रहा है। पर वास्तविकता यह है कि पुतिन द्वारा थोपी जा रही शर्तें, यूक्रेन या किसी भी स्वतंत्र राष्ट्र के लिए आत्मसमर्पण के बराबर हैं। किसी देश से उसकी भूमि छोड़ने की मांग तब और अस्वीकार्य हो जाती है जब उस भूमि पर कब्ज़ा युद्ध के बल से किया गया हो और लाखों लोग विस्थापित हुए हों।
दूसरी ओर, यूक्रेन की स्थिति भी कठिन है। सैनिकों की संख्या, हथियारों की क्षमता और संसाधनों की कमी स्पष्ट हो रही है। अमेरिका की नीति में परिवर्तन और यूरोप की थकान भी धीरे-धीरे सामने आ रही है। ऐसे में कीव के लिए युद्ध जारी रखना भारी लागत का प्रश्न बन रहा है। पर यूक्रेन के नेतृत्व का कठोर रुख यह संकेत देता है कि वे किसी भी कीमत पर अपनी संप्रभुता पर समझौता नहीं करेंगे।
वहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका द्वारा प्रस्तुत शांति-योजना पर भी सवाल उठ रहे हैं। पहला मसौदा यूरोप को विश्वास में लिए बिना तैयार किया गया, जो यह दर्शाता है कि अमेरिका की प्राथमिकता युद्ध रोकने की है, पर किस कीमत पर, यह स्पष्ट नहीं है। यदि शांति की कीमत किसी राष्ट्र की सीमा का पुनर्लेखन है, तो यह भविष्य में किसी भी आक्रामक देश के लिए एक खतरनाक मिसाल बन सकती है।
देखा जाये तो भू-राजनीति का सबसे बड़ा सत्य यही है कि युद्ध कभी केवल मोर्चों पर नहीं जीते जाते, वे बातचीत की मेज़ पर तय होते हैं। पुतिन यह बात भली-भाँति समझते हैं। इसी कारण वह एक ऐसा वातावरण बना रहे हैं जिसमें रूस अपनी सैन्य बढ़त को शांति वार्ता के दौरान लाभ में बदल सके। वह एक साथ यह भी कह रहे हैं कि ज़ेलेंस्की “अवैध” हैं ताकि भविष्य में किसी समझौते को वे अपनी सुविधानुसार व्याख्यायित कर सकें।
यूक्रेन की चुनौती अब दोहरी है। युद्धभूमि पर अपनी स्थिति को इतना स्थिर रखना कि रूस किसी निर्णायक विजय का दावा न कर सके। साथ ही वार्ता के मंच पर ऐसा नैतिक और कूटनीतिक दबाव बनाए रखा जाये कि उसके हितों की अनदेखी न हो।
वैसे दुनिया को यह नहीं भूलना चाहिए कि यह संघर्ष केवल दो देशों का विवाद नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय कानून, सीमा की अक्षुण्णता और युद्ध द्वारा भू-क्षेत्र बदलने की स्वीकार्यता का प्रश्न है। यदि आज यूक्रेन की जमीन को मान्यता देकर शांति की कोशिश की जाती है, तो कल किसी भी बड़े देश को अपने छोटे पड़ोसियों पर हमला करने का साहस मिल सकता है। युद्ध और शांति के इस दोराहे पर, अंतरराष्ट्रीय समुदाय की जिम्मेदारी है कि वह ऐसा समाधान खोजे जो किसी भी देश की संप्रभुता की कीमत पर न हो। शांति आवश्यक है, लेकिन ऐसी शांति जो न्याय पर आधारित हो। वरना जो शांति आज की जाएगी, वह कल नए युद्धों की नींव बन जाएगी।
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