भारत और चीन के बीच कई सालों से तनावपूर्ण रिश्तें रहे हैं। इसके कई कारण भी हैं। लेकिन वर्तमान संदर्भ में देखें तो धीरे धीरे दोनों देशों के बीच रिश्ते काफी ज्यादा सुधर रहे हैं। इस सुधरने की वजह अमेरिका बना। अमेरिका की तरफ से दोनों देशों के बीच जिस तरह से टैरिफ लगाया गया। उसको लेकर भारत और चीन नजदीक आ रहे हैं। अब खबर ये आ रही है कि चीन में भारत की तरफ से कुछ प्रतिबंध लगाए गए थे। इसी को लेकर चर्चा चल रही है कि कुछ प्रतिबंध को जल्द ही हटाया जा सकता है। एफडीआई के जरिए जब किसी देश से भारत में निवेश आता है तो उसको लेकर नियम और कानून बहुत हैं। अमेरिका, भारत और चीन तीन देश हैं। अमेरिका ने पहले चीन पर 145 % का टैरिफ लगाया। बदले में चीन ने 125 % टैरिफ लगा दिया था। ये सारा मसला एफडीआई का है। अमेरिका का बहुत ज्यादा निवेश चीन में है। एप्पल के प्रोडक्शन से लेकर टेस्ला के सबसे बड़ा पॉवर प्लाट तक, सैकड़ों अमेरिकी कंपनियों का चीन में निवेश है। ऐसे में टैरिफ लगने पर वहां से बनने वाला सामान अमेरिका में मंहगा मिलेगा। एफडीआई बहुत ज्यादा है औऱ चीन उस एफडीआई को रोक सकता है। इसलिए अमेरिका धमकी जरूर दे सकता है, लेकिन बहुत ज्यादा सख्त चीन पर नहीं होता है।
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गलवान की 2020 की घटना के बाद सरकार ने प्रेस नोट 3 के नियम को कड़ा किया था। अब एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने कहा कि बीजिंग के साथ संबंधों में सुधार के तहत, भारत चीन से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर लगे कुछ प्रतिबंधों में ढील दे सकता है। अधिकारी ने कहा ज़रूरत पड़ने पर हम प्रेस नोट 3 पर पुनर्विचार कर सकते हैं। सभी विकल्प खुले हैं। सरकार के प्रमुख थिंक टैंक नीति आयोग ने पिछले महीने चीन से 24% तक एफडीआई के लिए अनिवार्य पूर्व अनुमोदन की शर्त को हटाने का सुझाव दिया था।
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पिछले महीने, नीति आयोग ने 24 प्रतिशत तक के चीनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए अनिवार्य पूर्वानुमति की आवश्यकता को हटाने की सिफारिश की थी। हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच संबंधों में गर्मजोशी आई है, जिसकी एक वजह मंत्रियों और अधिकारियों की द्विपक्षीय यात्राएँ भी हैं। सीधी उड़ानों की बहाली, पर्यटकों के आवागमन में वृद्धि और सीमा विवादों को सुलझाने के लिए गहन बातचीत ने भी तनाव कम करने में मदद की है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ उपायों के प्रभाव से यह मेल-मिलाप और भी तेज़ हो गया है, जिसमें 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं पर 50% टैरिफ लागू हो गया है।
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मौजूदा नियमों के तहत, चीनी संस्थाओं के सभी निवेशों के लिए भारत सरकार से सुरक्षा मंज़ूरी ज़रूरी है। ये प्रतिबंध पहली बार जुलाई 2020 में लागू किए गए थे, जब भारत ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं और शत्रुतापूर्ण अधिग्रहण को रोकने की ज़रूरत का हवाला देते हुए, ज़मीनी सीमा साझा करने वाले देशों की कंपनियों को सरकारी ख़रीद अनुबंधों में भाग लेने से रोक दिया था। आर्थिक सर्वेक्षण 2024 में चीनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर प्रतिबंधों में थोड़ी ढील देने का भी सुझाव दिया गया है, और कहा गया है कि इससे वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में भारत का एकीकरण बढ़ सकता है और निर्यात वृद्धि को बढ़ावा मिल सकता है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने पिछले सप्ताह कहा था कि यदि परिस्थितियाँ अनुकूल हों, तो चीनी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) पर प्रतिबंधों की समीक्षा पर विचार किया जा सकता है।