Sunday, August 31, 2025
spot_img
Homeराष्ट्रीयगलवान घाटी के शहीदों को भूली सरकार, अमेरिकी दबाव में झुके मोदी?...

गलवान घाटी के शहीदों को भूली सरकार, अमेरिकी दबाव में झुके मोदी? India-China की नयी दोस्ती पर उठाए कांग्रेस ने सवाल

दुनिया के दो सबसे ज़्यादा आबादी वाले देश – जिनके पास दुनिया की दो सबसे बड़ी सैन्य शक्तियाँ हैं – अपनी लंबी और विवादित ऊँचाई वाली सीमा पर हफ़्तों से आमने-सामने थे। 5 मई 2020 से शुरू होकर, चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच लद्दाख और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में विवादित पैंगोंग झील के पास और सिक्किम और तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र के बीच सीमा के पास, चीन-भारत सीमा पर कई स्थानों पर आक्रामक हाथापाई, आमना-सामना और झड़पें हुईं। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर भी कई स्थानों पर झड़पें हुईं।
मई के अंत में, चीनी सेना ने गलवान नदी घाटी में भारतीय सड़क निर्माण पर आपत्ति जताई। भारतीय सूत्रों के अनुसार, 15-16 जून 2020 को हुई हाथापाई में चीनी और भारतीय सैनिकों की मौत हो गई। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया है कि दोनों पक्षों के सैनिकों को बंदी बना लिया गया और अगले कुछ दिनों में रिहा कर दिया गया, जबकि दोनों पक्षों के आधिकारिक सूत्रों ने इससे इनकार किया। 7 सितंबर को, 45 वर्षों में पहली बार, एलएसी पर गोलियां चलाई गईं, दोनों पक्षों ने गोलीबारी के लिए एक-दूसरे को दोषी ठहराया। भारतीय मीडिया ने यह भी बताया कि भारतीय सैनिकों ने 30 अगस्त को पीएलए पर चेतावनी के तौर पर गोलियां चलाईं।
 

इसे भी पढ़ें: 9 सितंबर को iPhone 17 सीरीज का ‘धमाकेदार’ लॉन्च! नये मॉडल में बड़ा बदलाव- 24MP सेल्फी कैमरा और 1.64 लाख तक दाम, जाने और क्या है खास?

अब लगभग 7 साल बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को तियानजिन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात की। यह 2020 के गलवान संघर्ष के बाद उनकी पहली चीन यात्रा है, 2020–2021 चीन-भारत झड़पों ने द्विपक्षीय संबंधों को गंभीर रूप से तनावपूर्ण बना दिया था। इस मुलाकात को दो एशियाई दिग्गजों के बीच संबंधों को फिर से स्थापित करने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जो कभी बातचीत तो कभी टकराव के बीच उलझे रहे हैं। अब शी से मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 2026 में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत आने का निमंत्रण दिया है। शी जिनपिंग ने निमंत्रण के लिए उन्हें धन्यवाद दिया और नई दिल्ली को इसकी अध्यक्षता के लिए अपना पूर्ण समर्थन देने की पेशकश की। विदेश मंत्रालय ने रविवार को तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन के दौरान दोनों नेताओं के बीच हुई बैठक के बाद यह जानकारी दी।
 

इसे भी पढ़ें: PM Modi Invites Xi Jinping to India | पीएम मोदी का शी जिनपिंग को BRICS न्योता! सीमा विवाद के समाधान पर जोर, कहा- भारत-चीन प्रतिद्वंद्वी नहीं, विकास भागीदार

 
आगामी वार्ता को लेकर एक अहम सवाल यह है- क्या तियानजिन में कोई नया आयाम जुड़ सकता है? यह मुलाकात मोदी-शी संबंधों के जटिल इतिहास को दर्शाती है, जिसमें सभ्यतागत जुड़ाव से लेकर सैन्य टकराव तक शामिल है, क्योंकि दोनों देश आगे बढ़ने का रास्ता तलाश रहे हैं। क्या मोदी सरकार गलवान घाटी में जो कुछ हुआ है वह भूल गयी है?
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच रविवार को मुलाकात के बाद कांग्रेस ने केंद्र पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि क्या ‘‘न्यू नॉर्मल’’ (नयी सामान्य स्थिति) चीन की आक्रामकता और ‘‘सरकार की कायरता’’ से परिभाषित किया जाना चाहिए। कांग्रेस ने सवाल किया कि क्या प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार का चीन के साथ सुलह पर जोर देना वास्तव में उसकी क्षेत्रीय आक्रामकता को वैध ठहरा रहा है। मोदी ने तियानजिन में चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के साथ अपनी बैठक में कहा कि भारत आपसी विश्वास, सम्मान और संवेदनशीलता के आधार पर चीन के साथ अपने संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। 
कांग्रेस महासचिव एवं संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर लिखा, ‘‘आज प्रधानमंत्री मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग के बीच हुई मुलाकात का आकलन निम्नलिखित संदर्भों में किया जाना चाहिए- जून 2020 में गलवान घाटी में चीनी आक्रामकता के चलते हमारे 20 सबसे बहादुर जवानों ने अपनी जान की कुर्बानी दी। इसके बावजूद, 19 जून 2020 को प्रधानमंत्री मोदी ने चीन को कायराना तरीके से (कुख्यात) क्लीन चिट दे दी।’’ उन्होंने कहा कि सेना प्रमुख ने लद्दाख में चीन के साथ सीमा पर यथास्थिति की पूर्ण बहाली की मांग की थी। रमेश ने कहा, ‘‘लेकिन इसे हासिल करने में विफल रहने के बावजूद मोदी सरकार ने चीन के साथ सुलह की दिशा में कदम बढ़ाए जिससे चीन की उस क्षेत्र में आक्रामकता को अप्रत्यक्ष रूप से वैधता मिल गई।’’ 
उन्होंने कहा कि चार जुलाई, 2025 को उप-सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के साथ चीन की ‘जुगलबंदी’ पर जोरदार और स्पष्ट रूप से बात की थी। रमेश ने कहा, ‘‘मगर इस अशुभ गठजोड़ पर ठोस प्रतिक्रिया देने के बजाय मोदी सरकार ने इसे नियति मानकर चुपचाप स्वीकार कर लिया और अब चीन को राजकीय दौरों से पुरस्कृत कर रही है।’’ उन्होंने कहा कि चीन ने यारलुंग त्संगपो पर एक विशाल जलविद्युत परियोजना की घोषणा की है जिसके ‘‘हमारे उत्तर-पूर्वी राज्यों पर बेहद गंभीर प्रभाव पड़ेंगे लेकिन मोदी सरकार की तरफ से इस मुद्दे पर एक शब्द भी नहीं बोला गया।’’ 
रमेश ने दावा किया कि चीन से आयात की अनियंत्रित ‘डंपिंग’ जारी है, जिसने हमारी एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु, मध्यम उद्यम) इकाइयों को बुरी तरह प्रभावित किया है। ‘डंपिंग’ का अर्थ होता है कि निर्माता द्वारा किसी उत्पाद को सामान्य मूल्य से कम कीमत पर दूसरे देश को निर्यात करना जिससे उस देश को नुकसान होता है। रमेश ने कहा, ‘‘अन्य देशों की तरह सख्त कदम उठाने के बजाय भारत ने चीनी आयातकों को लगभग खुली छूट दे दी है।
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular

Recent Comments