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Tuesday, August 4, 2026
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UP पंचायत चुनाव में फंसी सरकार: CM योगी और OP राजभर खोज रहे नया रास्ता

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव टल चुके हैं, लेकिन अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि चुनाव होने तक पंचायतों की कमान किसके हाथ में होगी? क्या राज्य में प्रशासक नियुक्त किए जाएंगे या फिर मौजूदा ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक समिति का अध्यक्ष बनाकर उनका कार्यकाल आगे बढ़ाया जाएगा? यह सवाल इस वक्त पूरे उत्तर प्रदेश के गांवों और चुनावी चर्चाओं में छाया हुआ है।

राजभर और मुख्यमंत्री के विचारों में द्वंद!

हाल ही में उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने इस संबंध में एक संकेत दिया था। उनके अनुसार, वे इस पक्ष में नजर आ रहे हैं कि गांवों में एक प्रशासक समिति का गठन किया जाए और ग्राम प्रधानों को ही इस समिति का अध्यक्ष बना दिया जाए।

हालांकि, इस पूरे मामले पर अंतिम और निर्णायक फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लेना है। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री अभी इस विषय पर गहराई से विचार कर रहे हैं और उन्होंने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं।

सरकार के सामने हैं दो बड़े पहलू

उत्तर प्रदेश सरकार इस वक्त दोतरफा कशमकश में फंसी हुई है:

  • पहला पहलू (प्रधानों को कमान सौंपने पर नाराजगी): यदि सरकार ग्राम प्रधानों को प्रशासक समिति का अध्यक्ष बनाती है, तो गांवों में चुनाव की तैयारी कर रहे अन्य भावी उम्मीदवार नाराज हो सकते हैं। पिछले एक साल से जो लोग अपनी पंचायतों में मेहनत कर रहे हैं, पैसा खर्च कर रहे हैं और हर सुख-दुख में जनता के बीच बने हुए हैं, उनके समर्थक इस फैसले से असंतुष्ट हो सकते हैं। इसका सीधा असर आगामी विधानसभा चुनावों पर पड़ सकता है।
  • दूसरा पहलू (प्रशासकों को कमान सौंपने पर भ्रष्टाचार का डर): यदि कमान पूरी तरह से सरकारी प्रशासकों के हाथ में सौंप दी जाती है, तो विपक्ष और जनता की ओर से ‘लूट’ और विकास कार्य ठप होने के आरोप लग सकते हैं, जैसा कि कोरोना काल के दौरान देखा गया था। इसके अलावा, वर्तमान में अधिकतर ग्राम प्रधान सरकार के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, ऐसे में उन्हें नाराज करना भी चुनावी गणित को बिगाड़ सकता है।

विधानसभा चुनाव से जुड़ा है पूरा मामला

उत्तर प्रदेश की राजनीति में यह साफ दिखाई दे रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनावों के बाद ही संपन्न होंगे। चर्चा यह भी है कि उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव अपने तय समय से पहले, यानी 15 दिसंबर के आसपास (सर्दियों की शुरुआत से पहले) कराए जा सकते हैं। यही वजह है कि सरकार अगले 3-4 महीनों में विकास कार्यों और अपनी योजनाओं को तेजी से पूरा करना चाहती है ताकि जनता के बीच मजबूत पकड़ बनाई जा सके।

अंतिम निर्णय कब?

माना जा रहा है कि आगामी 26 मई तक इस स्थिति पर पूरी तरह से तस्वीर साफ हो जाएगी कि पंचायतों की कमान किसे सौंपी जा रही है।

उत्तर प्रदेश अपनी विशाल जनसंख्या और राजनीतिक महत्व के कारण देश का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है, जहां का चुनावी असर केंद्र की राजनीति तक जाता है। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस राजनीतिक चक्रव्यूह से निकलने के लिए क्या रास्ता चुनते हैं।

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