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Saturday, August 29, 2026
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भारतीय रेलवे का बड़ा कदम: स्टेशनों पर शुद्ध पेयजल के लिए विशेष स्वच्छता अभियान शुरू, वाटर टैंक और फिल्टर होंगे कीटाणुरहित

भारतीय रेलवे ने स्टेशनों और कॉलोनियों में सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए विशेष स्वच्छता अभियान शुरू किया है। वाटर टैंकों की सफाई, यूवी/आरओ फिल्टर की जांच और दैनिक जल परीक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

नई दिल्ली: रेल यात्रियों को स्टेशनों पर स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए भारतीय रेलवे ने एक व्यापक स्वच्छता और जल गुणवत्ता प्रबंधन अभियान शुरू किया है। इस विशेष अभियान के तहत देशभर के रेलवे स्टेशनों पर स्थित सभी ओवरहेड व अंडरग्राउंड पानी की टंकियों, पाइपलाइनों, वाटर कूलरों और फिल्टर प्रणालियों की गहन सफाई तथा कीटाणुशोधन (Disinfection) का कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है।

यह पहल रेलवे बोर्ड द्वारा तैयार की गई दीर्घकालिक पेयजल गुणवत्ता प्रबंधन कार्य योजना का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य जल स्रोतों से लेकर अंतिम उपभोग बिंदु (नलों) तक पानी की शुद्धता को कड़े मानकों के अनुरूप बनाए रखना है।

टंकियों की सफाई और बुनियादी ढांचे की मरम्मत

इस अभियान के अंतर्गत सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में जल शोधन संयंत्रों, वाटर बूथों और वितरण नेटवर्क का व्यापक निरीक्षण करें।

  • टंकियों का कीटाणुशोधन: सभी भूमिगत (Underground), ओवरहेड और पीवीसी टंकियों को पूरी तरह खाली कर उनकी रासायनिक सफाई व कीटाणुशोधन किया जाएगा।
  • बायो-प्रोटेक्शन: टैंकों के वेंट और ओवरफ्लो पाइपों को पक्षियों, शैवाल (Algae) और अन्य बाहरी तत्वों से सुरक्षित रखने के लिए जालीदार कवर लगाए जाएंगे।
  • क्रॉस-कनेक्शन की रोकथाम: पीने योग्य और गैर-पीने योग्य जल प्रणालियों के बीच किसी भी प्रकार के क्रॉस-कनेक्शन को पूरी तरह खत्म किया जाएगा ताकि दूषित पानी का रिसाव न हो।
  • हैंडपंप और बोरवेल पर निगरानी: जिन स्टेशनों पर भूजल (बोरवेल/हैंडपंप) पर निर्भरता है, वहां जल गुणवत्ता की अलग से सघन जांच की जाएगी।

वाटर कूलर, UV/RO सिस्टम और वेंडिंग मशीनों की जांच

स्टेशनों पर लगे वाटर कूलरों और स्वचालित जल वेंडिंग मशीनों (Water Vending Machines) के जरिए मिलने वाले पानी के मानकों की नियमित निगरानी के लिए सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं:

  • फिल्टर कैंडल्स का समय पर प्रतिस्थापन: वाटर कूलरों के यूवी और आरओ सिस्टम की मरम्मत, सर्विसिंग और फिल्टर कैंडल्स को समयबद्ध तरीके से बदला जाएगा।
  • सक्रिय जल परीक्षण: स्रोत, ट्रीटमेंट प्लांट, टैंक, वाटर कूलर और नलों से पानी के नमूने लेकर उनकी भौतिक, रासायनिक और जीवाणु (Bacteriological) जांच की जाएगी।
  • दैनिक क्लोरीन निगरानी: पानी में अवशिष्ट क्लोरीन (Residual Chlorine) की मात्रा की दैनिक आधार पर जांच होगी, जिससे किसी भी तरह के बैक्टीरिया के पनपने की संभावना न रहे।

रेलवे पेयजल स्वच्छता अभियान: प्रमुख बिंदु

प्रमुख क्षेत्रकी जाने वाली कार्रवाई
जल भंडारण (Storage)सभी ओवरहेड और अंडरग्राउंड टैंकों की सफाई, रिसाव की मरम्मत व नए टैंकों का निर्माण
शुद्धिकरण (Purification)वाटर कूलर, RO और UV प्रणालियों का मेंटेनेंस व फिल्टर प्रतिस्थापन
गुणवत्ता जांच (Quality Testing)स्रोत से नल तक दैनिक क्लोरीन स्तर और जीवाणु परीक्षण
दायरा (Scope)रेलवे स्टेशनों के साथ-साथ रेलवे कॉलोनियां और कार्यस्थल

रेलवे कॉलोनियों और कार्यस्थलों तक विस्तार

रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह स्वच्छता अभियान केवल यात्री क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहेगा, बल्कि रेलवे कॉलोनियों, अस्पतालों और प्रशासनिक कार्यस्थलों में भी पेयजल आपूर्ति नेटवर्क को इसी तरह अपग्रेड किया जा रहा है।

क्षेत्रीय रेलवे को पहचानी गई सभी कमियों और उनके निवारण के लिए की गई कार्रवाइयों का स्टेशनवार डेटा प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है, ताकि इस पूरी प्रक्रिया की केंद्रीय स्तर पर व्यवस्थित निगरानी की जा सके।

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