अभी बीते दिनों की ही बात है जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पाकिस्तान के बीच के सीजफायर को लेकर एक नया दावा किया था। जब ट्रंप ने कहा था कि मैंने पाकिस्तान से बात की और कहा कि अगर तनाव जारी रखा तो अमेरिका कोई व्यापार समझौता नहीं करेगा। बल्कि इतना ऊंचा टैरिफ लगाएगा कि उनका सिर घूम जाएगा। लेकिन अब ट्रंप के टैरिफ वॉर के बीच भारत ऐसा कदम उठाने वाला है, जिसे जानकर खुद ट्रंप का सिर चकरा जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार यानी 31 अगस्त को अपने चीनी समकक्ष शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय बैठक कर सकते हैं। वह सात साल में पहली बार चीन की यात्रा पर जा रहे हैं।
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दोनों नेताओं की पिछली मुलाकात 23 अक्टूबर, 2024 को रूस के कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान हुई थी। प्रधानमंत्री मोदी ने आखिरी बार 2018 में चीन की यात्रा की थी। पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर मई 2020 में चीनी घुसपैठ के बाद शुरू हुए सैन्य गतिरोध के बाद भारत और चीन के राजनयिक संबंधों में खटास आ गई थी। तब से, दोनों देशों ने संबंधों को सुधारने की कोशिश की है, मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू किया है, चीनी पर्यटकों के लिए वीज़ा जारी किए हैं और सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने पर विचार कर रहे हैं। हालाँकि, मई में इन प्रयासों को फिर से झटका लगा जब भारत को ऑपरेशन सिंदूर के बाद हुई शत्रुता के दौरान पाकिस्तानी सेना को सक्रिय चीनी सहायता के सबूत मिले।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए 31 अगस्त से 1 सितंबर तक चीन के बंदरगाह शहर तियानजिन की यात्रा करेंगे, जहाँ उनकी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ बैठक होने की भी संभावना है। प्रधानमंत्री की यह पहली चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब दोनों पक्ष जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हुई घातक झड़पों के बाद गंभीर तनाव में आए द्विपक्षीय संबंधों को सुधारने के प्रयास कर रहे हैं।
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प्रधानमंत्री मोदी की चीन यात्रा नई दिल्ली में चीनी विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात के कुछ दिनों बाद हो रही है। बैठक के बारे में जानकारी साझा करते हुए, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत और चीन दोनों अपने राजनयिक संबंधों को मज़बूत करने की दिशा में लगातार प्रगति कर रहे हैं। उन्होंने एक्स पर पोस्ट में कहा कि विदेश मंत्री वांग यी से मिलकर खुशी हुई। पिछले साल कज़ान में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मेरी मुलाक़ात के बाद से, भारत-चीन संबंधों ने एक-दूसरे के हितों और संवेदनशीलता के सम्मान के साथ निरंतर प्रगति की है। मैं शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान तियानजिन में होने वाली हमारी अगली मुलाक़ात का बेसब्री से इंतज़ार कर रहा हूँ। भारत और चीन के बीच स्थिर, पूर्वानुमानित और रचनात्मक संबंध क्षेत्रीय और वैश्विक शांति एवं समृद्धि में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।