प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत और जापान एक स्वतंत्र, खुले, शांतिपूर्ण, समृद्ध और नियम-आधारित हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। आतंकवाद और साइबर सुरक्षा को लेकर हमारी चिंताएं समान हैं। हमारे साझा हित रक्षा और समुद्री सुरक्षा से जुड़े हैं। हमने रक्षा उद्योग और नवाचार के क्षेत्र में आपसी सहयोग को और मज़बूत करने का फ़ैसला किया है। भारत और जापान की साझेदारी आपसी विश्वास पर आधारित है, जो हमारी राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को प्रतिबिंबित करती है और हमारे साझा मूल्यों और विश्वासों से आकार लेती है, हम साथ मिलकर अपने लोगों और विश्व के लिए शांति, प्रगति और समृद्धि का एक साझा सपना लेकर चलते हैं। मानव संसाधन आदान-प्रदान की कार्ययोजना के तहत अगले 5 वर्षों में विभिन्न क्षेत्रों में दोनों पक्षों के 5 लाख मानव संसाधन आदान-प्रदान को प्रोत्साहित किया जाएगा। 50 हजार कुशल भारतीय जापान की अर्थव्यवस्था में योगदान देंगे। भारत और जापान के बीच साझेदारी दिल्ली और टोक्यो तक सीमित नहीं रहेगी… इससे व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के नए द्वार खुलेंगे।
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पीएम मोदी ने कहा कि हमारा मानना है कि जापानी तकनीक और भारतीय प्रतिभा एक विजयी संयोजन है। हम हाई-स्पीड रेल पर काम कर रहे हैं, साथ ही नेक्स्ट जेनरेशन मोबिलिटी पार्टनरशिप के तहत बंदरगाहों, विमानन और जहाज निर्माण जैसे क्षेत्रों में भी तेज़ी से प्रगति करेंगे। हम चंद्रयान 5 मिशन में सहयोग के लिए ISRO और JAXA के बीच बनी सहमति का स्वागत करते हैं। हमारा जॉइंट क्रेडिट मैकेनिज्म ऊर्जा के लिए एक बड़ी जीत है, यह दर्शाता है कि हमारी हरित साझेदारी हमारी आर्थिक साझेदारी जितनी ही मज़बूत है। इस दिशा में, हम सतत ईंधन पहल और बैटरी आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी भी शुरू कर रहे हैं। हम आर्थिक सुरक्षा सहयोग पहल शुरू कर रहे हैं, जिसके तहत हम महत्वपूर्ण और रणनीतिक क्षेत्रों में एक व्यापक दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ेंगे… इस संदर्भ में, डिजिटल साझेदारी 2.O और AI सहयोग पहल पर काम किया जा रहा है।
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पीएम मोदी ने कहा कि आज हमने अपनी विशेष रणनीतिक और वैश्विक साझेदारी के एक नए और सुनहरे अध्याय की मज़बूत नींव रखी है। हमने अगले दशक के लिए एक रोडमैप तैयार किया है। हमारे विज़न के मूल में निवेश, नवाचार, आर्थिक सुरक्षा, पर्यावरण, तकनीक, स्वास्थ्य, गतिशीलता, लोगों के बीच आदान-प्रदान और सीधी, पारदर्शी साझेदारी है। हमने 10 वर्षों में जापान से भारत में 10 ट्रिलियन येन के निवेश का लक्ष्य रखा है। भारत और जापान के लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स को जोड़ने पर विशेष बल दिया जाएगा।
पीएम मोदी ने कहा कि मैं प्रधानमंत्री इशिबा को उनके आत्मीय शब्दों और गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए धन्यवाद देता हूं। आज हमारी चर्चाएं उपयोगी और उद्देश्यपूर्ण रहीं। हम दोनों इस बात पर सहमत हुए कि दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं और जीवंत लोकतंत्रों के रूप में हमारी साझेदारी न केवल हमारे दोनों देशों के लिए, बल्कि वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है।