Saturday, August 30, 2025
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India Pak Journey Part 1 | भारत-पाक संबंध: दोस्ती की विफल कोशिशों के 78 साल

अक्सर ये कहा जाता है कि अगर हमारे पड़ोसी अच्छे हैं तो हमारी रोजमर्रा की कई छोटी-बड़ी बातों की फिक्र यूं ही खत्म हो जाती है। यही फॉर्मूला देशों पर भी लागू होता है। अब अगर पड़़ोस के घर में आग लगी हो तो इस पर आंखें मूंदने से इसकी लपटें हमारे घरों को भी अपनी चपेट में ले सकती हैं। इसलिए आज भारत के एक ऐसे पड़ोसी देश के बारे में बात करेंगे जिसके बारे में मई 2003 में पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि हम दोस्त बदल सकते हैं, लेकिन अपने पड़ोसी नहीं। हालांकि, मौका मिलने पर पाकिस्तान एक ऐसा पड़ोसी है जिसे हर कोई बदलना चाहेगा। कट्टर प्रतिद्वंद्वी भारत के साथ पाकिस्तान के रिश्ते हमेशा से खराब रहे हैं। यह परंपरागत रूप से भारत में आतंक का निर्यात करता रहा है जबकि यहां से खाद्य उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और औद्योगिक कच्चे माल का आयात करता रहा है। भारत के साथ पाकिस्तान का रिश्ता, जिसे वह कट्टर प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखता है, कोई रहस्य नहीं है। भारत और पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव अपने चरम पर है। जम्मू कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल मंगलवार की दोपहर 3:00 बजे जो कुछ हुआ उसने इंसानियत को तार तार कर दिया। भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों ने करीब 40 टूरिस्टों के समूह को घेर लिया और अंधाधुंध गोलीवारी शुरू कर दी। जिसका जवाब भारत ने इस अंदाज में दिया कि पाकिस्तान हो या कोई और देश उनका सिंदूर से कोई वास्ता भले नहीं हो, लेकिन आज के बाद कोई इस सिंदूर की ताक़त को भुला नहीं पाएगा। 

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फिर भी, भारत और पाकिस्तान के बीच इस ताज़ा संकट की जड़ उनके वर्तमान स्वरूप में संप्रभु राष्ट्र के रूप में उनके गठन से ही जुड़ी है। ऐसे में आज आपको दक्षिण एशिया के दो पड़ोसी देशों के बीच के तनाव की सिलसिलेवार ढंग से पूरी कहानी बताते हैं।

1940-50 का दशक

भारतीय उपमहाद्वीप 1858 से 1947 तक एक ब्रिटिश उपनिवेश था, जब ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन अंततः समाप्त हो गया और उपमहाद्वीप दो देशों में विभाजित हो गया।  स्वतंत्रता दिवस जहां भारत के लिए एक तरफ जश्न मनाने वाली बात थी तो वहीं दूसरी तरफ देश का भयंकर बंटवारा भी हुआ था। 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों ने इंडियन इंडिपेंडेंस एक्ट पर नई दिल्ली में रात के 12:00 बजे दस्तखत किए थे कई सदियों बाद भारत को आजादी मिली लेकिन बंटवारे के तौर पर इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी भारत की छाती पर खींची लकीर से दूसरी तरफ एक नया मुल्क पाकिस्तान बन गया देश के दो टुकड़े हो गए शुरुआती 2 साल तक पाकिस्तान में 15 अगस्त को ही स्वतंत्र दिवस मनाया गया लेकिन फिर इसे बदलकर 14 अगस्त कर दिया गया । लाशों के ढेर पर मुल्क का बंटवारा और पाकिस्तान के क़ायद-ए-आज़म बनने की सनक पाले जिन्ना ने पाकिस्तान तो बना दिया। लेकिन इसके बाद भी दो राष्ट्र सिद्धांत पर बना उनका मुल्क आज भी वहीं अटका पड़ा है।  विभाजन की वजह से कारण अब तक का सबसे बड़ा और सबसे रक्तरंजित मानव प्रवास हुआ, जिससे लगभग 1.5 करोड़ लोग विस्थापित हुए। इस प्रक्रिया ने पूरे क्षेत्र में मुसलमानों, हिंदुओं और सिखों के बीच भीषण सांप्रदायिक हिंसा और दंगे भड़काए, जिनमें 2,00,000 से 20 लाख लोग मारे गए। इसके बाद सीमा विवाद और अलगाववादी आंदोलन शुरू हो गए। 

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आजादी के बाद ही पाक ने किया हमला

आजादी के बाद से ही पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर पर हमला करने की फिराक में था। 21 अक्टूबर 1947 को पाकिस्तानी सेना द्वारा समर्थित उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (एनडब्ल्यूएफपी) के कई हजार पश्तून आदिवासियों ने जम्मू-कश्मीर को महाराजा के शासन से मुक्त कराने के लिए घुसपैठ की। पाकिस्तानी सेना के नियमित नेतृत्व में फाटा (आज के तालिबान क्षेत्र) से लगभग 5,000 जिहादी जनजातियों ने 21 अक्टूबर, 1947 को इसी स्पष्ट आह्वान के साथ इस क्षेत्र पर हमला किया।मुजाहिदीनों ने बारामूला सेक्टर में तेजी से प्रगति की, 11000 से 14,000 निवासियों को मार डाला।  भीम्बर से मीरपुर तक कोटली और मुजफ्फराबाद से बारामूला तक हिंदुओं और सिखों का सफाया कर दिया। वे केवल लूटपाट करने, घर जलाने, महिलाओं का बलात्कार करने और युवतियों का अपहरण करने के लिए रुके थे। कबाइली हमला करते समय नारा लगाते थे, सिख का सिर, मुसलमान का घर और हिंदू की जर। यानी पाकिस्तान की सेना ने कबायलियों को हुकूम दिया था कि उन्हें जम्मू कश्मीर में जैसे ही कोई सिख दिखाई दे उसका सिर काट कर दिया जाए, जैसे ही कोई भारत समर्थक मुसलमान दिखाई दे, उसका घर जला दिया जाए और हिंदुओं की संम्पत्ति पर कब्जा किया जाए। कश्मीर के राजा ने कबायलियों को खदेड़ने में भारत से सहायता मांगी। भारतीय सैनिकों को श्रीनगर भेज दिया गया और उन्होंने अपना तेज अभियान शुरू कर दिया। कुछ ही दिनों में सेना ने बारामूला और जम्मू-कश्मीर के महत्वपूर्ण हिस्सों पर फिर से कब्जा कर लिया।

दो हिस्सों में बंट गया भारत का कश्मीर

1947 में पाकिस्तान से हुई लड़ाई के बाद कश्मीर 2 हिस्सों में बंट गया। पाक-अधिकृत कश्मीर, भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य का वह हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में हमला कर अधिकार कर लिया था। अगस्त 1947 में पाकिस्तान बना और करीब दो महीने बाद 2.06 लाख वर्ग किलोमीटर में फैली जम्मू और कश्मीर की रियासत भी बंट गई। कहा जाता है कि महाराजा हरि सिंह के देरी से लिए गए निर्णय और पंडित जवाहर लाल नेहरू के यूएन में जाने से जम्मू कश्मीर बंट गया। पाक अधिकृत कश्मीर, भारत के जम्मू व कश्मीर राज्य का वो हिस्सा है जिस पर पाकिस्तान ने 1947 में हमला कर अधिकार कर लिया था। पीओके मूल कश्मीर का वो भाग है, जिसकी सीमाएं पाकिस्तानी पंजाब, उत्तर पश्चिम में अफगानिस्तान के वाखान गलियारे से चीन के जिन्जियांग क्षेत्र से और भारतीय कश्मीर से पूर्व में लगती है। यदि गिलगित बाल्टिस्तान को हटा दिया जाए तो पाक अधिकृत कश्मीर का क्षेत्रफल 13300 वर्ग किलोमीटर यानी भारतीय कश्मीर का लगभग 3 गुना है। इसकी आबादी लगभग 40 लाख है। 

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