1970 के चुनाव में शेख मुजीबुर्रहमान की आवामी लीग को जबरदस्त जीत हासिल हुई थी। लेकिन पाकिस्तान के राष्ट्रपति जनरल याहिया खान और चुनाव में दूसरे नंबर पर रहने वाली पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के नेता जुल्फिकार अली भुट्टो ने शेख मुजीबुर्रहमान को पाकिस्तान की कमान सौंपने से इनकार कर दिया। इस रवैये से नाराज शेख मुजीबुर्रहमान ने 7 मार्च 1971 को पश्चिमी पाकिस्तान की हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंक दिया। जब पश्चिमी पाकिस्तान की सेना ने पूर्वी पाकिस्तान में ऑपरेशन सर्च लाइट शुरू किया तब उनका पहला निशाना हिन्दू ही थे। 1971 ए ग्लोबल हिस्ट्री ऑफ क्रिएशन ऑफ बांग्लादेश पलायन पर एक बात दर्ज की है। उन्होंने लिखा है कि ऑपरेशन के शुरुआती दिनों में पूर्वी पाकिस्तान से पलायन करने वाले 80 फीसदी लोग हिन्दू थे। 25 मार्च 1971 को पाकिस्तान ने ऑपरेशन सर्च लाइट को हरी झंडी दिखाई थी। पूर्वी पाकिस्तान में बंगाली राष्ट्रवाद के आंदोलन को कुचलने की शुरुआत की गई थी। आंदोलन के प्रणेता शेख मुजीबुर रहमान को गिरफ्तार कर लिया गया था।अत्याचार के शिकार लोग भागकर भारत आने लगे। तब भारत की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल सैम मानेकशॉ से पूर्वी पाकिस्तान में कार्रवाई करने को कहा लेकिन मानेकश़ॉ ने इससे साफ इनकार कर दिया। जिसका फायदा ये हुआ कि भारतीय सेना को युद्ध में उतरने के लिए तैयारी करने का अतिरिक्त समय मिल गया। नतीजा जब पाकिस्तान ने हवाई हमला किया तो उसका मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी की जा चुकी थी। 16 दिसंबर 1971 पाकिस्तान ने 92 हजार सैनिकों के साथ भारतीय सेना के सामने सरेंडर कर दिया था। सरेंडर की वो तस्वीरें इतिहास के पन्नों में एक अहम अध्याय की तरह दर्ज हैं। इसके बाद पूर्वी पाकिस्तान का नया नामकरण हुआ और बांग्लादेश के नाम से एक आजाद मुल्क अस्तित्व में आया। भारत बांग्लादेश को मान्यता देने वाला पहला देश था।
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शिमला समझौते पर हस्ताक्षर
28 जून से 2 जुलाई, 1972 तक शिमला, हिमाचल प्रदेश में कई दौर की चर्चाएँ हुईं। तत्कालीन भारतीय प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के राष्ट्रपति जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते का उद्देश्य युद्ध के बाद के तनाव को कम करना और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व को बढ़ावा देना था। भारत ने 1971 के युद्ध में पाकिस्तान को हराया था और एक स्वतंत्र बांग्लादेश बनाने में मदद की थी।
1974 में भारत ने स्माइलिंग बुद्धा नामक एक ऑपरेशन में एक परमाणु उपकरण का विस्फोट किया। भारत ने इस उपकरण को शांतिपूर्ण परमाणु विस्फोटक माना।
समझौते के मुख्य प्रावधान
विवादों का द्विपक्षीय समाधान: भारत और पाकिस्तान ने सभी विवादों, खासकर जम्मू-कश्मीर मुद्दे को द्विपक्षीय वार्ता के माध्यम से हल करने पर सहमति जताई। इस खंड ने संयुक्त राष्ट्र जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों से कश्मीर मुद्दे को प्रभावी रूप से हटा दिया।
नियंत्रण रेखा का सम्मान: दोनों देश 17 दिसंबर, 1971 को स्थापित युद्धविराम रेखा का सम्मान करने पर सहमत हुए। इसे नियंत्रण रेखा (एलओसी) के रूप में जाना जाता है, और दोनों पक्ष इसे एकतरफा रूप से नहीं बदलने पर सहमत हुए।
क्षेत्र और युद्धबंदियों की वापसी: भारत पश्चिमी पाकिस्तान में कब्जे वाले क्षेत्रों को वापस करने और 90,000 युद्धबंदियों को रिहा करने पर सहमत हुआ। बदले में, पाकिस्तान ने बांग्लादेश को मान्यता देने और द्विपक्षीय संबंधों को सामान्य बनाने का वादा किया।
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शांति और सहयोग: दोनों देशों ने एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान करने और बल के प्रयोग से बचने के लिए प्रतिबद्धता जताई। वे व्यापार, संचार और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बेहतर बनाने पर भी सहमत हुए।
परमाणु स्थिरता: समझौते ने परमाणु वृद्धि के जोखिम को कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के महत्व को मजबूत किया। दोनों देशों ने संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की।