भारत और चीन के बीच इस वक्त बैठकों का दौर चल रहा है। जहां से सामने आई तस्वीरें दोनों देशों के रिश्तों में हो रहे सुधार की ओर इशारा करती है। क्योंकि भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिश्री खुद इस वक्त बीजिंग के दौरे पर हैं। जहां पर उन्होंने चीनी अधिकारियों के साथ मैराथॉन बैठकों को अंजाम दिया है। भारतीय विदेश सचिव जिन्हें चीन के मामलों का अच्छा जानकार माना जाता है। वह इस वक्त बीजिंग पहुंचे हुए हैं। जहां पर वह एक खास मिशन के तहत गए हैं। उन्होंने सोमवार 27 जुलाई को चीन की उप विदेश मंत्री हुवा चुनिएंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के कई गद्दावर नेताओं के साथ अलग-अलग बैठकों को अंजाम दिया है। इन बैठकों का मकसद सिर्फ मेलजोल को बढ़ाना नहीं था। बल्कि दोनों देशों के बीच बिगड़े हुए संतुलन को वापस पटरी पर लाना था। इस बातचीत का सबसे अहम हिस्सा भारत और चीन की सीमा पर शांति और स्थिरता पर बातचीत करना था।
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दोनों देशों ने आधिकारिक तौर पर माना है कि अगर रिश्तों को आगे बढ़ाना है तो सरहद पर अमल कायम करना पहली शर्त है। भारत दूतावास के मुताबिक दोनों पक्षों ने स्वीकार किया है कि सीमावर्ती इलाकों में शांति बनाए रखना द्विपक्षी संबंधों के लिए अनिवार्य है। यानी कि भारत और चीन दोनों ही देश चाहते हैं कि दोनों के बॉर्डर पर शांति की स्थिति बनी रहे। तभी दोनों देश विकास की ओर काम कर पाएंगे। इन बड़ी बैठकों में सीमा विवाद के अलावा जिन बातों पर चर्चा हुई वो व्यापार, अर्थव्यवस्था और सांस्कृतिक आदान-प्रदान था। दोनों देशों ने इस बात को फिर से दोहराया है कि भारत और चीन एक दूसरे के लिए विकास के अवसर हैं। व्यापारिक बाधाओं को कम करने और आपसी सहयोग के नए रास्तों को तलाशने पर गंभीर चर्चा हुई। विक्रम मिश्री का यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि वह पहले चीन में भारत के राजदूत थे। यानी कि उन्हें चीनी कूटनीति की गहरी समझ है। इसलिए वह भारत की ओर से पक्ष रखने के लिए बेहतर आदमी हैं।
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हाल ही में मनीला में जब विदेश मंत्री एस जयशंकर और चीनी विदेश मंत्री वांगी के बीच बातचीत हुई थी तभी वहां से जो बयान आया था वो यही था कि भारत और चीन आपस में साझेदार हो सकते हैं। और अब विदेश सचिव का यह चीन दौरा उसी प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की एक कड़ी मानी जा रही है। हालांकि सीमा विवाद जैसे संवेदनशील मुद्दे पर अब भी विवाद पूरी तरीके से खत्म नहीं हुआ है। लेकिन लगातार बढ़ रहे कूटनीतिक संवाद यह संकेत दे रहे हैं कि भारत और चीन के मतभेद बातचीत के जरिए सुलझ जरूर सकते हैं। जहां पर दोनों ही देश लगातार नए रास्तों की तलाश में जुटे हुए हैं जिससे सीमा विवाद को कम किया जा सके और दोनों ही देश एक दूसरे के साथ मिलकर साझेदारी को फिर से पटरी पर ला सके। विदेश सचिव का लगातार ऐसे बड़े मैराथन बैठकों को अंजाम देना और चीन के अंदर बड़े-बड़े कद्दावर नेताओं से मिलना दिखाता है कि भारत भी चीन के साथ अपने संबंधों को ठीक रखना चाहता है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि बीजिंग में इन बैठकों का असली अंजाम क्या होगा?


