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Tuesday, August 4, 2026
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इधर हुई CIA एजेंट की गिरफ्तारी, उधर NSA डोभाल से मिलने पहुंचे अमेरिकी राजदूत!

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गौर ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से मुलाकात की है और यह मुलाकात ऐसे वक्त में आई है जब भारत ने अमेरिकी नागरिक को आतंकी साजिश के आरोप में गिरफ्तार किया है। हालांकि इस मुलाकात की जानकारी खुद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने दी। इस बैठक में दोनों देशों के बीच सुरक्षा सहयोग, इंटेलिजेंस शेयरिंग और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई। इस मुलाकात को लेकर भारत सरकार की ओर से फिलहाल कोई आधिकारिक पुष्टि या विस्तृत बयान सामने नहीं आया। बैठक के बाद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गौर ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी लगातार मजबूत हो रही है। बातचीत में डिफेंस कोऑपरेशन, इंडोपेसिफिक सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी प्रयास और तकनीकी सहयोग जैसे विषय शामिल रहे और यह मुलाकात ऐसे वक्त में हुई जब अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच संघर्ष भीषण रूप से देखने को मिल रहा है।  

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इस बैठक के समय को लेकर राजनीतिक और सुरक्षा हल्कों में भी चर्चाएं तेज क्योंकि हाल ही में भारत की एनआईए ने एक बड़े ऑपरेशन में सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया था। जिनमें से एक अमेरिकी नागरिक भी शामिल है। इस अमेरिकी नागरिक की पहचान मैथ्यू ओरान बेंडाइक के रूप में हुई। उस पर आरोप है कि वह एक नेटवर्क का हिस्सा था जो म्यांमार में सक्रिय विद्रोही गुटों को ड्रोन वॉरफेयर और आधुनिक सैन्य तकनीक की ट्रेनिंग दे रहा था। हालांकि इस मामले में सबसे बड़ा विवाद उसका सीआईए कनेक्शन का कयास बना हुआ है। वेंडाइक को लेकर लंबे समय से यह चर्चा रही है कि वो अमेरिकी खुफिया एजेंसी सीआईए के लिए प्रॉक्सी या एसेट की तरह काम करता है। हालांकि उसने खुद इन आरोपों से इंकार किया है और किसी भी आधिकारिक एजेंसी ने इसकी पुष्टि नहीं की और यही वजह है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद यह मामला सिर्फ कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसे खुफिया और कूटनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। एनआईए की जांच के मुताबिक यह पूरा नेटवर्क टूरिस्ट वीजा पर भारत आया और बाद में मिजोरम के सीमावर्ती इलाकों के जरिए अवैध रूप से म्यांमार में दाखिल हुआ और वहां कथित तौर पर उन्होंने विद्रोही गुटों को ड्रोन और हथियारों की ट्रेनिंग दी। एजेंसी का दावा है कि इस नेटवर्क के यूरोप से जुड़े संपर्क भी सामने आए और इसका मकसद म्यांमार के विद्रोही गुटों को आधुनिक युद्ध तकनीक उपलब्ध कराना था। 

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सभी आरोपियों को फिलहाल यूएपीए के तहत हिरासत में ले लिया गया है। भारत की तरफ से इस पूरे मामले में संदेश साफ माना जा रहा है। किसी भी विदेशी नेटवर्क को सीमा पार गतिविधियों या प्रोक्सी संघर्ष के लिए भारतीय क्षेत्र का इस्तेमाल करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। और जब यह गिरफ्तारी हुई दो दिन बाद अमेरिकी राजदूत ने भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोबाल से मुलाकात की। क्यों हुई इस पर ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई। लेकिन ऐसा अंदाजा लगाया जा रहा है कि इस गिरफ्तारी पर भी बातचीत जरूर हुई होगी।
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