back to top
Tuesday, August 4, 2026
Homeअंतरराष्ट्रीयचुप-चुप बैठो हो जरूर कोई बात है...अमेरिका-ईरान आपस में भयंकर भिड़ रहे,...

चुप-चुप बैठो हो जरूर कोई बात है…अमेरिका-ईरान आपस में भयंकर भिड़ रहे, इजरायल में इतना सन्नाटा क्यों है भाई!

जब आग दोनों तरफ लगी हो, तो सबसे पहले चिंगारी सुलगाने वाले का अचानक खामोश हो जाना हैरान भी करता है और खटकता भी है। अमेरिका और ईरान के बीच थमा-थमा सा दिखने वाला बारूद अब एक भयानक विस्फोट की शक्ल ले चुका है। दोनों ओर से हो रहे ताबड़तोड़ हमलों ने एक ऐसे विनाशकारी क्षेत्रीय युद्ध की आहट दे दी है जिससे पूरी दुनिया कांप रही है। लेकिन इस खूनी खेल के बीच, सबसे दिलचस्प और रहस्यमयी भूमिका इस समय इस्राइल की है, जो बिल्कुल ‘अदृश्य’ होकर पर्दे के पीछे चला गया है। यह वही इस्राइल है जिसके प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सालों से वॉशिंगटन के गलियारों में घूम-घूमकर डोनाल्ड ट्रंप के कान में यह मंत्र फूंकते थे कि ‘तेहरान का इलाज सिर्फ सैन्य हमला है’। यह वही नेतन्याहू हैं जिन्होंने पेंटागन को यह यकीन दिलाया था कि अयातुल्ला खामेनेई और ईरान के शीर्ष नेतृत्व को एक ही झटके में नेस्तनाबूद किया जा सकता है, जिसके बाद 28 फरवरी के उस भयानक हमले की स्क्रिप्ट लिखी गई। यहाँ तक कि ट्रंप की जान को खतरा बताने वाली खुफिया फाइलें भी खुद इस्राइल ने ही अमेरिका को सौंपी थीं, ताकि आग में घी का काम किया जा सके। लेकिन आज न तो नेतन्याहू का कोई आक्रामक बयान आ रहा है, न तेल अवीव की तरफ से कोई विजयघोष हो रहा है। जब अमेरिका खुद फ्रंटफुट पर आकर ईरान को मटियामेट करने पर तुला है, तो इस्राइल ने अचानक यह ‘मौन व्रत’ क्यों धारण कर लिया है? क्या यह किसी बहुत बड़े तूफान के आने से पहले का सन्नाटा है? क्या इस्राइल इस जंग की पूरी जिम्मेदारी और बदनामी का ठीकरा अमेरिका के सिर फोड़कर खुद को सुरक्षित रखना चाहता है? या फिर खेल इससे कहीं ज्यादा गहरा है, जहाँ मोहरे आगे कर दिए गए हैं और असली खिलाड़ी हाथ बांधकर तमाशा देख रहा है? 

इसे भी पढ़ें: चाबहार पर फिर अटैक! भारत के ड्रीम प्रोजेक्ट को बार-बार क्यों टारगेट कर रहा अमेरिका?

ईरान की गोलीबारी से सुरक्षित दूरी

फिलहाल, इज़राइल की तटस्थ रहने की रणनीति ने उसे ईरानी जवाबी कार्रवाई का मुख्य निशाना बनने से बचा लिया है, जबकि बहरीन, कुवैत, जॉर्डन और ओमान जैसे अन्य क्षेत्रीय देश, जहाँ अमेरिकी सैन्य अड्डे हैं, तेहरान की जवाबी कार्रवाई का सबसे अधिक शिकार हुए हैं। इससे इज़राइल को अपने पहले से ही तनावग्रस्त वायु रक्षा प्रणालियों को चुपचाप मजबूत करने के लिए बहुमूल्य समय मिल गया है। गौरतलब है कि हमलों के नवीनतम दौर में अमेरिका ने इज़राइली क्षेत्र को प्रक्षेपण यान के लिए इस्तेमाल करने से भी परहेज किया है। लेकिन यह संतुलन शायद ज़्यादा समय तक न रहे। तेहरान की एक भी गलत चाल – या इज़राइल पर सीधे हमले – से अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बड़े युद्ध में बदल सकता है; ऐसे में नेतन्याहू जानते हैं कि उनका देश शायद हमेशा इससे दूर नहीं रह पाएगा।

काम पूरा करने की मांग करने वाली आवाज़ें

हालांकि, इज़राइल का सार्वजनिक रूप से शांत रवैया यह नहीं दिखाता कि वह दोबारा सैन्य कार्रवाई नहीं करना चाहता। द न्यूयॉर्क टाइम्स’ के अनुसार, अप्रैल में ईरान के साथ युद्धविराम के बाद से ही इज़राइल में काम पूरा करने की मांग उठती रही है। देश के सुरक्षा तंत्र से जुड़े कई लोगों का मानना ​​है कि यह अभियान तब खत्म हो गया, जब इज़राइल ईरान के अहम ऊर्जा बुनियादी ढांचे और अन्य रणनीतिक ठिकानों पर हमला कर सकता था; उनकी नज़र में इन हमलों से इस्लामिक रिपब्लिक (ईरान) काफी कमज़ोर हो सकता था। इज़राइल के पूर्व प्रधानमंत्री शिमोन पेरेस के पूर्व सलाहकार और अब इज़राइल पॉलिसी फ़ोरम के फ़ेलो निम्रोद नोविक ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को बताया रक्षा तंत्र और सरकार में हर कोई एक और मौका चाहता है। उन्होंने कहा IDF (इज़राइली सेना) का एक पुराना नारा है बस एक और पहाड़ी, और जीत पक्की है।” साथ ही, उन्होंने यह भी कहा कि इतिहास में शायद ही कभी ऐसा हुआ हो जब यह बात सच साबित हुई हो। नोविक ने द न्यूयॉर्क टाइम्स को यह भी बताया कि इज़राइल की जनता का एक बड़ा हिस्सा और अधिक मिसाइल हमलों और रोज़मर्रा की ज़िंदगी में रुकावटों को सहने के लिए तैयार होगा, अगर इसका मतलब उस ईरानी खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना हो, जिसे वे खतरा मानते हैं।

इसे भी पढ़ें: Strait of Hormuz में गहराया संकट, US-Iran सैन्य तनाव के चलते तेल आपूर्ति पर मंडराया बड़ा खतरा

नेतान्याहू क्यों पीछे हट रहे हैं?

साथ ही, ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ में बताए गए जानकारों ने चेतावनी दी कि एक और युद्ध से इज़राइल को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, ईरान के इंफ्रास्ट्रक्चर के खिलाफ किसी भी बड़े हमले से देश के नेताओं के मुकाबले ईरानी नागरिकों को ज़्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है। अखबार ने यह भी बताया कि हालिया तनाव के दौरान नेतन्याहू की चुप्पी एक बड़ी रणनीतिक सोच को दिखाती है। जानकारों ने ‘द न्यूयॉर्क टाइम्स’ को बताया कि इज़राइल के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसी छवि बनाना ठीक नहीं होगा कि वह एक और युद्ध चाहता है। खासकर तब, जब आम धारणा यह है कि नेतन्याहू ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पिछले संघर्ष में शामिल करने में अहम भूमिका निभाई थी। फिलहाल, इज़राइल ने उस रास्ते को चुना है जिसे कई लोग सबसे कम जोखिम वाला मानते हैं: यानी इंतज़ार करना, जबकि वॉशिंगटन और तेहरान हमलों और जवाबी हमलों के सिलसिले में उलझे हुए हैं। विश्लेषकों का एक और तर्क यह है कि अगर इज़राइल ईरान पर हवाई हमले करता है, तो उसे जॉर्डन, सीरिया और इराक के हवाई क्षेत्र का भी इस्तेमाल करना होगा, जिससे टकराव का दायरा बढ़ेगा और क्षेत्रीय संकट और गहरा जाएगा। 
RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

- Advertisment -

Most Popular