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Tuesday, August 4, 2026
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वो भारतवंशी, जिनकी दलीलों के सामने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में ट्रंप हुए चारों खाने चित

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ़ कानूनों को रद्द करके उन्हें उनके दूसरे कार्यकाल का सबसे बड़ा झटका दिया। लेकिन ट्रंप को लगे इस झटके की जड़ में भारतीय मूल के एक वकील की दलीलें थीं, जिन्होंने सुप्रीम कोर्ट के इस ऐतिहासिक फैसले में अहम भूमिका निभाई है, जिससे ट्रंप बेहद नाराज़ हैं। जी हां, हम बात कर रहे हैं नील कात्याल की, जो अमेरिका के पूर्व कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल और लेखक हैं। उन्होंने छोटे व्यवसायों के एक समूह का अदालत में प्रतिनिधित्व किया और अपने शब्दों में कहें तो “पूर्ण और निर्णायक जीत” हासिल की। अमेरिकी टैरिफ पर सुप्रीम कोर्ट के 6-3 के फैसले पर टिप्पणी करते हुए, कात्याल ने कहा कि इस आदेश ने एक महत्वपूर्ण संदेश को रेखांकित किया है – राष्ट्रपति शक्तिशाली होते हैं, लेकिन अमेरिकी संविधान उससे भी कहीं अधिक शक्तिशाली है।

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कात्याल ने ट्वीट किया, आज, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कानून के शासन और पूरे अमेरिका में नागरिकों के लिए आवाज़ उठाई है। अमेरिका में, केवल कांग्रेस ही अमेरिकी जनता पर कर लगा सकती है।” कात्याल ने एक महत्वपूर्ण पहलू पर भी प्रकाश डाला – राष्ट्रपति ट्रम्प द्वारा नियुक्त तीन न्यायाधीशों में से दो ने इस मामले में उनके खिलाफ मतदान किया।

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नील कात्याल कौन हैं?

12 मार्च, 1970 को शिकागो में भारतीय अप्रवासी माता-पिता प्रतिभा (डॉक्टर) और सुरेंद्र (इंजीनियर) के घर जन्मे नील कात्याल ने डार्टमाउथ कॉलेज से स्नातक की उपाधि प्राप्त की और फिर प्रतिष्ठित येल लॉ स्कूल में आगे की पढ़ाई की। कात्याल के करियर में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया जब उन्हें 2010 में राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा कार्यवाहक सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया गया। अपने कार्यकाल में, उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष 50 से अधिक मामलों की पैरवी की है। उनके द्वारा लड़े गए प्रमुख मामलों में 1965 के मतदान अधिकार अधिनियम की संवैधानिकता का बचाव करना और ट्रंप के 2017 के यात्रा प्रतिबंध को चुनौती देना शामिल है, जिसे हालांकि सर्वोच्च न्यायालय ने बरकरार रखा। उनकी न्यायिक विशेषज्ञता के लिए उन्हें 2011 में अमेरिकी न्याय विभाग का सर्वोच्च नागरिक सम्मान, एडमंड रैंडोल्फ पुरस्कार मिला। वे फोर्ब्स की अमेरिका के शीर्ष 200 वकीलों की सूची में लगातार दो वर्षों (2024 और 2025) तक शामिल रहे हैं।
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