वार-पलटवार, धुआंधार भाषण और लंबी चर्चा के बाद आखिरकार राज्यसभा से भी वक्फ संशोधन विधेयक 2025 पारित हो गया। इसके पक्ष में 128 वोट पड़े। संसद के दोनों सदनों ने इस बिल को पारित कर दिया है। ऐसे में राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बिल कानून में तब्दील हो जाएगा। इस बिल को लेकर भले ही तरह-तरह की बातें की जा रही हो, लेकिन इस बिल को पास करने में मोदी सरकार कामयाब रही। मोदी सरकार के लिए यह अग्नि परीक्षा से थी जिसमें उसने आसानी से सफलता हासिल कर ली। एनडीए बिल के पक्ष में पूरी तरीके से एकजुट रहा और ऐसे में बिल को पास करने में सरकार को मदद मिली। आज भी राज्यसभा में लगभग 12 घंटे से ज्यादा की चर्चा हुई। कई सदस्यों ने इसको लेकर सुझाव दिए। बाद में इसे बहुमत से राज्यसभा में पारित कर दिया गया। विपक्ष के सारे संशोधन प्रस्ताव खारिज कर दिए गए।
राज्यसभा में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि जब पहली बार वक्फ संशोधन विधेयक का मसौदा तैयार किया गया था और जो विधेयक हम अब पारित कर रहे हैं, उसमें बहुत सारे बदलाव हैं। अगर हमने किसी के सुझाव नहीं माने होते तो यह विधेयक पूरी तरह से अलग होता। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि यह किसी धर्म के खिलाफ नहीं है। रीजीजू ने कहा, ‘‘किसी भी तरीके से सरकार वक्फ़ संपत्ति का प्रबंधन नहीं करती और उसमें हस्तक्षेप नहीं करती।’’ उन्होंने साफ तौर पर कहा कि इस बिल से एक भी मुस्लिम का नुकसान नहीं होगा। भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने वक्फ विधेयक को देश के लिए एक नए युग की शुरुआत बताया और इस पहल के लिए सरकार की सराहना की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस संशोधन से मुस्लिम समुदाय को लाभ होगा और कांग्रेस की आलोचना की कि वह पहले इस तरह के सुधारों को लागू करने में विफल रही।
राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने वक्फ विधेयक को मुसलमानों के खिलाफ बताते हुए बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि यह (विधेयक) अल्पसंख्यकों को तबाह करने के लिए लाया गया है। खरगे ने कहा कि देश में ऐसा माहौल बना है कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों को तंग करने के लिए लाया गया है। इसके साथ ही उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से आग्रह किया कि वह इस विधेयक को प्रतिष्ठा का प्रश्न नहीं बनाएं और सरकार इसे वापस ले ले। कांग्रेस अध्यक्ष खरगे ने उच्च सदन में वक्फ संशोधन विधेयक, 2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए कहा कि लोकसभा में इस विधेयक के पक्ष में 288 मत आए जबकि विपक्ष में 238 मत। उन्होंने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि इसमें खामियां और कमियां हैं तथा सरकार को इस पर गौर करना चाहिए।
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समाजवादी पार्टी (सपा) नेता रामगोपाल यादव ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जब उसने देश की सारी संपत्ति बेच ली तब उसकी नजर वक्फ की संपत्ति पर गयी। उच्च सदन में वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए सपा नेता ने कहा कि 2014 से 2024 तक सरकार को याद नहीं रहा कि वक्फ के पास कितनी संपत्ति और कितना पैसा है। उन्होंने कहा, ‘‘…जब सारी संपत्ति बेच ली तब देखा कि कहां (संपत्ति) बची है। ऐसा मत कीजिए।’’ यादव ने कहा कि सभी लोग मिल कर काम करेंगे तभी देश की तरक्की हो सकती है। उन्होंने कहा कि सभी धर्मों के साथ समान व्यवहार होना चाहिए और मुसलमानों को यह नहीं लगे कि उनके साथ अन्याय हो रहा है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष जेपी नड्डा ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में कहा कि वक्फ संशोधन विधेयक का मकसद वक्फ की जमीन के प्रबंधन में पारदर्शिता सुनिश्चित करना है ताकि उनके दुरूपयोग पर काबू पाया जा सके और ‘मलाई खाने’ वाले जमीन माफिया पर रोक लग सके। उन्होंने कहा कि यह विधेयक राष्ट्र के हित में है और किसी पार्टी के पक्ष में नहीं है और न ही किसी वोट बैंक को ध्यान में रखकर इसे लाया गया है। राज्यसभा में वक्फ़ संशोधन विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए नड्डा ने कहा कि मौजूदा वक्फ कानून से मुसलमानों को नुकसान हो रहा था और जमीन माफिया मलाई खा रहे थे। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उसे ऐसे ‘‘मलाई खोरों’’ से दूर रहने को कहा।
राज्यसभा में बुधवार को तृणमूल कांग्रेस ने वक्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला और दावा किया कि यह विधेयक संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन करने के साथ ही राज्यों के अधिकारों को भी प्रभावित करता है। उच्च सदन में वक्फ़ संशोधन विधेयक, 2025 पर हुई चर्चा में भाग लेते हुए तृणमूल कांग्रेस सदस्य मोहम्मद नदीमुल हक ने कहा कि यह विधेयक सिर्फ मुसलमानों से ही नहीं बल्कि पूरे देश से जुड़ा है और यह मौलिक अधिकारों का हनन भी करता है। उन्होंने इस विधेयक को गैर-जरूरी कदम बताया और कहा कि यह असंवैधानिक और अल्पसंख्यकों के हितों के खिलाफ है। हक ने कहा कि संविधान कोई किताब नहीं बल्कि देश को रास्ता दिखाने वाला है।
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राज्यसभा में बुधवार को भाजपा के एक सदस्य ने वक्फ़ संशोधन विधेयक को लेकर तमाम तरह की भ्रांतियां फैलाये जाने का आरोप लगाते हुए कहा कि इस विधेयक के प्रावधानों से देश के गरीब, पसमांदा मुसलमानों और महिलाओं की स्थिति सुधारने में मदद मिलेगी। उच्च सदन में वक्फ़ संशोधन विधेयक, 2025 पर चर्चा में भाग लेते हुए भारतीय जनता पार्टी के डॉ राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा कि कांग्रेस सदस्य नसीर हुसैन जब राज्यसभा का चुनाव जीते थे तो कर्नाटक विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये गये थे और इसका विरोध करने पर भारतीय जनता पार्टी के सदस्यों को जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि 2024 में जब सत्तारूढ़ भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वह 240 सीटों पर सिमट गयी तो उसे इस वक्फ़ कानून की याद आयी और वह इसे दमनकारी कानून कहने लगी। उन्होंने कहा कि भाजपा शासित कई प्रदेशों में तो वक्फ़ बोर्ड गठित ही नहीं किये गये और आज अल्पसंख्यक मंत्री वक्फ़ में पारदर्शिता लाने की बात कर रहे हैं।
राज्यसभा में बृहस्पतिवार को कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी नीत सरकार पर आरोप लगाया कि उसने 2013 में वक्फ़ संशोधन विधेयक का समर्थन करने के बाद अपना रुख इसलिए बदल लिया क्योंकि 2024 के चुनाव में उसे स्पष्ट बहुमत नहीं मिला और वह वक्फ़ कानून के बारे में देश में तमाम तरह की भ्रांतियां फैला रही है। वक्फ़ (संशोधन) विधेयक, 2025 पर उच्च सदन में हो रही चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस के सैयद नसीर हुसैन ने कहा कि 2013 में जब यह विधेयक संसद में आया तो लोकसभा और राज्यसभा, दोनों सदनों में भाजपा के नेताओं ने उसका समर्थन किया था लेकिन आज इसे ‘दमनकारी कानून’ करार दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 2024 में जब सत्तारूढ़ भाजपा को पूर्ण बहुमत नहीं मिला और वह 240 सीटों पर सिमट गयी तो उसे इस वक्फ़ कानून की याद आयी और वह इसे दमनकारी कानून कहने लगी।