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Tuesday, August 4, 2026
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सब्र की परीक्षा न लें वरना…सोनम वांगचुक के सपोर्ट में उतरे अन्ना हजारे, कर दी ये मांग

सामाजिक कार्यकर्ता अन्ना हजारे ने शनिवार को केंद्र सरकार से शिक्षाविद सोनम वांगचुक के साथ बातचीत करने की अपील की। ​​उन्होंने कहा कि वांगचुक की मांगों पर चर्चा होनी चाहिए, जिन्हें दिल्ली पुलिस इलाज के लिए सफदरजंग अस्पताल ले गई थी। हज़ारे ने कहा सरकार को उनकी सहनशक्ति की परीक्षा नहीं लेनी चाहिए। (उनकी मांगों पर) हां या ना कहें, लेकिन बातचीत करने में क्या बुराई है? वांगचुक NEET पेपर लीक मामले को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफ़े की मांग कर रहे हैं। शनिवार (18 जुलाई) को दिल्ली के जंतर-मंतर पर उनकी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का 21वां दिन है। हज़ारे की यह अपील दिल्ली में लोकपाल कानून की मांग को लेकर की गई उनकी उस भूख हड़ताल के कई साल बाद आई है, जिसने 2011 में UPA सरकार को हिलाकर रख दिया था।
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पुलिस का कहना है कि वांगचुक की सेहत की निगरानी के लिए दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के तहत उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जबकि CJP के अभिजीत दिपके का दावा है कि क्लाइमेट एक्टिविस्ट को ज़बरदस्ती ले जाया गया। कुछ छात्रों ने यह भी दावा किया कि विरोध स्थल पर उन पर लाठीचार्ज किया गया। जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी वहां पहुंचे और खुद को मेडिकल टीम बताया। ANI की रिपोर्ट के मुताबिक, एक प्रदर्शनकारी ने बताया कि उन्होंने वॉलंटियर्स को एक तरफ हटने का आदेश दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाते समय दिल्ली हाई कोर्ट के निर्देशों का गलत मतलब निकाला और उनकी हिरासत को अदालत की अवमानना ​​करार दिया।
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दिल्ली हाई कोर्ट ने निर्देश दिया था कि सोनम वांगचुक की सेहत पर नज़र रखी जाए और कोई भी कदम तभी उठाया जाए जब उनकी सेहत बिगड़े। हमारी मेडिकल टीम दिन में 2-3 बार उनकी सेहत की जांच करती है और वह खुद भी रोज़ाना वीडियो पोस्ट करके अपनी सेहत के बारे में जानकारी देते हैं, जो स्थिर रही है। दिल्ली पुलिस ने कोर्ट के उस आदेश का गलत मतलब निकाला और उसी आदेश की आड़ में उन्हें हिरासत में ले लिया। यह हिरासत कोर्ट के आदेश की अवमानना ​​है। 

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