गाजियाबाद के मोदीनगर क्षेत्र स्थित भोजपुर थाना एक बार फिर विवादों में घिर गया है। फर्जी पासपोर्ट सत्यापन मामले में एसओ समेत 10 पुलिसकर्मियों पर हुई कार्रवाई का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा था कि अब थाने के मालखाने से 80 हजार रुपये की हेराफेरी का नया मामला सामने आ गया है।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस हेड मोहर्रिर पर गबन का आरोप लगाया गया है, उनका निधन मार्च 2024 में हो चुका है। इसके बावजूद थाना प्रभारी की ओर से उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया है, जिससे पूरे मामले ने और भी तूल पकड़ लिया है।
क्या है पूरा मामला?
सूत्रों के अनुसार, थाने के मालखाने में जमा जब्त धनराशि का मिलान करने के दौरान 80 हजार रुपये की कमी पाई गई। जांच में यह राशि रिकॉर्ड में दर्ज तो थी, लेकिन मालखाने में उपलब्ध नहीं मिली। प्रारंभिक जांच में उस समय के हेड मोहर्रिर की जिम्मेदारी तय की गई, जो मालखाने के अभिलेख और जब्त सामान की देखरेख के प्रभारी थे।
हालांकि, संबंधित हेड मोहर्रिर का निधन लगभग एक वर्ष पहले हो चुका है। ऐसे में उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किए जाने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।
उठ रहे हैं कई सवाल
- जब हेड मोहर्रिर का निधन हो चुका था, तो अब मुकदमा दर्ज करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- क्या उस अवधि में अन्य किसी अधिकारी या कर्मचारी की जिम्मेदारी तय नहीं बनती?
- क्या मालखाने के ऑडिट और निगरानी व्यवस्था में लापरवाही हुई?
स्थानीय लोगों और पुलिस विभाग के जानकारों का कहना है कि मालखाना पुलिस व्यवस्था का बेहद संवेदनशील हिस्सा होता है, जहां जब्त नकदी, आभूषण, हथियार और अन्य सामान सुरक्षित रखे जाते हैं। ऐसे में धनराशि का गायब होना गंभीर प्रशासनिक चूक मानी जा रही है।
पहले भी विवादों में रहा है थाना
कुछ समय पहले इसी थाने में फर्जी पासपोर्ट सत्यापन प्रकरण सामने आया था, जिसमें एसओ सहित 10 पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की गई थी। उस मामले की जांच अभी जारी है। लगातार सामने आ रहे मामलों से थाने की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस अधिकारियों का क्या कहना है?
उच्चाधिकारियों का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। यदि जांच में अन्य किसी की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। विभागीय ऑडिट और रिकॉर्ड की दोबारा जांच के निर्देश भी दिए गए हैं।
आगे क्या?
अब सबकी नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि मृतक कर्मचारी के कार्यकाल में ही अनियमितता हुई थी, तो यह देखना होगा कि उस समय निगरानी कर रहे अधिकारियों की क्या भूमिका थी। वहीं, यदि मामला हाल का है तो जिम्मेदारी तय करना और भी महत्वपूर्ण हो जाएगा।
भोजपुर थाने में लगातार सामने आ रहे मामलों ने पुलिस महकमे की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। आने वाले दिनों में जांच के निष्कर्ष इस पूरे प्रकरण की दिशा तय करेंगे।


