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Tuesday, August 4, 2026
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संभल नमाज विवाद: इलाहाबाद हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, कहा—अगर कानून व्यवस्था संभाल नहीं सकते तो पद छोड़ दें

Allahabad High Court ने संभल में मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के मामले में सुनवाई करते हुए प्रशासन पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत ने कहा कि अगर Sambhal के SP और DM को लगता है कि नमाजियों की संख्या बढ़ने से कानून-व्यवस्था बिगड़ सकती है और वे इसे संभालने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्हें अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या फिर संभल से बाहर तबादला मांग लेना चाहिए।

यह टिप्पणी Allahabad High Court की दो सदस्यीय पीठ Justice Atul Sreedharan और Justice Siddharth Nandan ने 27 फरवरी 2026 को एक याचिका पर सुनवाई के दौरान की।

क्या है पूरा मामला

मामला मुनाज़िर खान बनाम उत्तर प्रदेश राज्य से जुड़ा है। याचिकाकर्ता का कहना है कि रमजान के दौरान गाटा नंबर 291 स्थित मस्जिद में नमाज पढ़ने से उन्हें रोका जा रहा है। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था की आशंका का हवाला देते हुए केवल 20 लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी है।

याचिका में कहा गया कि रमजान के दौरान मस्जिद में बड़ी संख्या में लोग नमाज पढ़ने आते हैं, इसलिए इस तरह की सीमा लगाना उचित नहीं है।

कोर्ट ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि राज्य का कर्तव्य है कि हर समुदाय को अपने निर्धारित धार्मिक स्थल पर शांतिपूर्वक पूजा-अर्चना करने का अधिकार मिले। अगर कोई स्थान निजी संपत्ति है और वहां नमाज या पूजा हो रही है तो इसके लिए राज्य से अनुमति लेने की जरूरत नहीं होती।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल उन मामलों में प्रशासन की अनुमति जरूरी होती है, जब धार्मिक कार्यक्रम सार्वजनिक जमीन पर हो या सार्वजनिक स्थान को प्रभावित करता हो।

जमीन के स्वामित्व पर विवाद

राज्य सरकार की ओर से बताया गया कि जिस जमीन पर नमाज पढ़ने की बात कही जा रही है, वह राजस्व अभिलेखों में मोहन सिंह और भूराज सिंह के नाम दर्ज है। इसी आधार पर प्रशासन ने सीमित संख्या में लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी थी।

अगली सुनवाई कब

हाईकोर्ट ने मामले में आगे की सुनवाई के लिए 16 मार्च 2026 की तारीख तय की है। साथ ही याचिकाकर्ता को निर्देश दिया गया है कि वह संबंधित स्थान की फोटो और राजस्व रिकॉर्ड अदालत में दाखिल करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नमाज किस स्थान पर अदा की जा रही है।

यह मामला फिलहाल संवेदनशील माना जा रहा है और अदालत ने प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए सभी समुदायों के अधिकारों की रक्षा करने की जिम्मेदारी भी याद दिलाई है।

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