महराजगंज उ॰प्र॰। ग्राम पंचायतों में कराए गए विकास कार्यों के ऑडिट में सामने आई आपत्तियों का समय पर निस्तारण न करने के कारण जिले के 83 ग्राम पंचायत सचिवों पर कार्रवाई की तलवार लटक गई है। पिछले सात वर्षों में कुल 502 ऑडिट आपत्तियां अब तक लंबित हैं, जिनमें करीब 4 करोड़ 87 लाख 75 हजार 279 रुपये का हिसाब स्पष्ट नहीं हो सका है।
हर साल होता है ऑडिट, फिर भी नहीं हुआ निस्तारण
ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों पर खर्च की पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए हर वर्ष ऑडिट कराया जाता है। इस दौरान खर्च से जुड़ी कई आपत्तियां दर्ज की जाती हैं, जिनका निस्तारण संबंधित सचिवों को करना होता है।
हालांकि, जिले के कई सचिवों ने इन आपत्तियों को गंभीरता से नहीं लिया, जिससे बड़ी धनराशि वर्षों से लंबित बनी हुई है।
इन सचिवों पर सबसे ज्यादा राशि लंबित
ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार कुछ ग्राम पंचायत सचिवों पर भारी वित्तीय जवाबदेही सामने आई है-
रामनाथ – ₹80.84 लाख
बाबूलाल – ₹37.47 लाख
कौशलेंद्र कुशवाहा – ₹36.31 लाख
विवेकानंद राय – लगभग ₹31 लाख
मिलिंद्र चौधरी – लगभग ₹31 लाख
रामपाल – ₹24.20 लाख
राजन गुप्ता – ₹15.58 लाख
ऋषिकेश पटेल, सुमन गुप्ता – करीब ₹14-14 लाख
संतोष – ₹13.90 लाख
नागेंद्र पांडेय – ₹12.23 लाख
विवेक पटेल – ₹11.69 लाख
प्रमोद यादव – ₹11.21 लाख
मुक्तिनाथ गुप्ता – ₹10.93 लाख
रामकृष्ण प्रसाद – करीब ₹10 लाख
इसके अलावा 68 अन्य सचिवों पर 8 लाख रुपये से लेकर 3500 रुपये तक की ऑडिट आपत्तियां लंबित हैं।
साल दर साल बढ़ती गई लंबित आपत्तियां
वित्तीय वर्षों के अनुसार लंबित ऑडिट आपत्तियों का विवरण इस प्रकार है-
2017–18 : 88
2018–19 : 156
2019–20 : 83
2020–21 : 87
2021–22 : 22
2022–23 : 47
2023–24 : 19
यह आंकड़े बताते हैं कि समय पर निस्तारण न होने के कारण मामलों का बोझ लगातार बढ़ता गया।
बैठक में दिए गए सख्त निर्देश
हाल ही में मुख्य विकास अधिकारी महेंद्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गई, जिसमें सभी संबंधित अधिकारियों और ग्राम पंचायत सचिवों को लंबित ऑडिट आपत्तियों का जल्द से जल्द निस्तारण करने के निर्देश दिए गए।
क्या बोले अधिकारी
जिला पंचायत राज अधिकारी श्रेया मिश्रा ने स्पष्ट किया कि जिन सचिवों के यहां ऑडिट आपत्तियां लंबित हैं, उन्हें शीघ्र जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा कि निर्धारित समय सीमा में जवाब न मिलने पर संबंधित सचिवों से नियमों के तहत धनराशि की रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
निष्कर्ष
ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ऑडिट आपत्तियों का समय पर निस्तारण बेहद जरूरी है। यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो संबंधित सचिवों पर वित्तीय रिकवरी और प्रशासनिक कार्रवाई तय मानी जा रही है।


