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Tuesday, August 4, 2026
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Iran में ‘साइलेंट तख्तापलट’? कूटनीति पर IRGC का कब्जा, मोजतबा खामेनेई और अहमद वाहिदी बने नए पावर सेंटर

ईरान के भीतर से आ रही खबरें दुनिया भर के रणनीतिकारों को चौंका रही हैं। ‘द न्यूयॉर्क पोस्ट’ और ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ (ISW) की हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के कट्टरपंथी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने देश के सैन्य और कूटनीतिक तंत्र पर पूरी तरह नियंत्रण कर लिया है। विश्लेषकों का मानना है कि सप्ताहांत में हुए इस बड़े बदलाव ने ईरान के नागरिक नेतृत्व और मध्यमपंथी हस्तियों को हाशिए पर धकेल दिया है। कहा जा रहा है कि यह बदलाव सप्ताहांत में हुआ, जिसमें IRGC कमांडर अहमद वाहिदी और उनके करीबी सहयोगियों ने इस्लामिक गणराज्य के भीतर एक प्रमुख नेतृत्व की भूमिका संभाल ली है। यह घटनाक्रम होर्मुज़ जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव और अमेरिका के साथ नियोजित संघर्ष-विराम वार्ता को दरकिनार करने के तेहरान के कदम के बीच सामने आया है।
 

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मध्यमपंथी नेताओं को दरकिनार किया गया

वाशिंगटन स्थित ‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ ने बताया कि विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित अधिक मध्यमपंथी हस्तियों को दरकिनार कर दिया गया है। हालांकि अराघची ने ट्रंप प्रशासन के साथ बातचीत के बाद इस रणनीतिक जलमार्ग को फिर से खोलने की इच्छा जताई थी, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार IRGC ने उनके फ़ैसले को पलट दिया और ज़ोर देकर कहा कि ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी दबाव के जवाब में इस जलडमरूमध्य को बंद ही रखा जाए।

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रिपोर्ट के अनुसार, वाहिदी को ईरान की ‘सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल’ के सचिव मोहम्मद बाक़िर ज़ोलघाद्र का समर्थन मिल गया है, जिससे सैन्य और रणनीतिक अभियानों पर उनकी पकड़ और मज़बूत हो गई है। IRGC ने इस क्षेत्र में अपनी मौजूदगी बढ़ा दी है, और हाल के संघर्षों में अपनी पारंपरिक नौसेना को हुए नुकसान के बाद अब वह तेज़ी से हमला करने वाले जहाज़ों (fast attack vessels) पर ज़्यादा निर्भर है।
तनाव तब और बढ़ गया जब रिपोर्ट के अनुसार ईरान ने जलडमरूमध्य से गुज़रने की कोशिश कर रहे कम से कम तीन जहाज़ों को निशाना बनाया, जिससे फ़ारसी खाड़ी में सैकड़ों जहाज़ फँस गए और नाकेबंदी और मज़बूत हो गई।

ईरानी नेतृत्व में मतभेद

ज़ोलघाद्र का प्रभाव कूटनीतिक प्रयासों तक भी फैल गया है। उन्हें इस महीने की शुरुआत में ईरान की वार्ता टीम में शामिल किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टीम IRGC के निर्देशों और सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई के अधिकार के अनुरूप काम करे।
‘इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर’ ने प्रतिनिधिमंडल के भीतर आंतरिक मतभेदों का ज़िक्र करते हुए बताया कि ज़ोलघाद्र ने IRGC नेतृत्व से शिकायत की थी कि अराघची ने तथाकथित ‘प्रतिरोध की धुरी’ (Axis of Resistance) के प्रति ईरान के समर्थन के मामले में लचीलापन दिखाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है। रिपोर्ट के अनुसार, इसके परिणामस्वरूप वार्ता टीम को तेहरान वापस बुला लिया गया; इस कदम को हुसैन ताइब सहित कई हस्तियों का समर्थन प्राप्त था।
रिपोर्ट से पता चलता है कि वाहिदी, मोजतबा खामेनेई के साथ मिलकर, अब ईरान में फ़ैसले लेने वाले प्रमुख व्यक्ति के रूप में उभरे हैं, जिससे IRGC प्रभावी रूप से संसदीय नेता मोहम्मद बाक़िर ग़ालिबफ़ जैसे नागरिक नेतृत्व वाली हस्तियों से ऊपर हो गया है। जानकारों का कहना है कि सत्ता में आया यह बदलाव पश्चिम के साथ बातचीत की संभावनाओं को काफी हद तक सीमित कर देता है, क्योंकि अराघची और ग़ालिबफ़ जैसे लोगों के पास नीति को प्रभावित करने का अधिकार नहीं है।
ये घटनाक्रम वॉशिंगटन के उन दावों को भी चुनौती देते हैं कि वरिष्ठ अधिकारियों के हालिया नुकसान के बाद ईरान के नेतृत्व का रवैया नरम पड़ गया है। नई बातचीत के लिए कोई स्पष्ट समय-सीमा न होने के कारण, इस बात को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क्या यह नाज़ुक संघर्ष-विराम मौजूदा समय-सीमा के बाद भी कायम रह पाएगा।
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