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Wednesday, August 5, 2026
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भारत की मिसाइल से साइप्रस मचाएगा धमाका, तुर्की की मीडिया में मची खलबली

क्या भारतीय मिसाइलें अब भूमध्य सागर यानी कि मेडिटेरियन सी की लहरों पर तैनात होने वाली हैं? क्या भारत का रक्षा उद्योग अब यूरोप के द्वार तक अपनी ढाक जमाने जा रहा है? यह सवाल  तुर्की का मीडिया चीख-चीख कर कर रहा है। जब से भारत और साइपरस ने अपनी दोस्ती को रणनीतिक साझेदारी में बदला है तब से अंकारा से लेकर इस्तांबुल तक बेचैनी साफ-साफ देखी जा सकती है। तुर्की की प्रमुख मीडिया वेबसाइट टीआर हैबर ने एक रिपोर्ट छापी है जिसने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। टीआर हैबर के मुताबिक भारत और साइपरस के बीच एक ऐसा समझौता हुआ है जिसके तहत भारतीय मिसाइलें और ड्रोन अब पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किए जा सकते हैं।  दरअसल हाल ही में साइपस गणराज के राष्ट्रपति निकोस भारत की आधिकारिक यात्रा पर आए। नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में पीएम मोदी और साइपरस के राष्ट्रपति के बीच हुई शिखर वार्ता सामान्य कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी। दोनों देशों ने अपने दशकों पुराने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के स्तर पर अपग्रेड कर दिया। लेकिन सबसे बड़ी खबर रक्षा गलियारों से निकल कर सामने आई। 

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दोनों देशों ने साल 2026 से साल 2031 तक के लिए एक डिफेंस कोऑपरेशन रोड मैप पर हस्ताक्षर कर दिए। यह 5 साल की योजना दोनों देशों के बीच सैन्य और तकनीकी सहयोग की एक नई इबारत लिखने वाला है। अब तुर्की की मीडिया टीआर हैवर की रिपोर्ट के अनुसार इस समझौते का असल मतलब यह है कि भारतीय रक्षा तकनीक अब उस क्षेत्र में प्रवेश कर रही है जिसे तुर्की अपना प्रभाव क्षेत्र मानता है। रिपोर्ट में हेडलाइन दी गई है कि साइपरस और भारत के बीच समझौता भारतीय मिसाइलों और ड्रोन को पूर्वी भूमध्य सागर में तैनात किया जा रहा है। तुर्की की मीडिया का मानना है कि साइपस अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए रूस या अन्य देशों के बजाय भारत की ओर देख रहा है। विशेष रूप से भारतीय ड्रोन तकनीक और मिसाइल प्रणालियों ने साइपरस का ध्यान खींचा है। अगर यह सच होता है तो यह रक्षा निर्यात के मामले में भारत की एक बहुत बड़ी कूटनीतिक जीत होगी। लेकिन सवाल यह है कि क्या खरीदेगा साइपरस?  टीआर हैबर की रिपोर्ट के मुताबिक साइपरस भारतीय रक्षा उद्योग द्वारा विकसित की गई अत्याधुनिक प्रणालियों में गहरी दिलचस्पी दिखा रहा है। इसमें दो चीजें सबसे प्रमुख है। पहला है मानव रहित हवाई वाहन। यानी भारत ने हाल ही में वर्षों में ड्रोन तकनीक में लंबी छलांग लगाई है। 

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निगरानी से लेकर सटीक हमले करने वाले ड्रोन तक। भारत अब एक ग्लोबल प्लेयर है। दूसरा है मिसाइल टेक्नोलॉजी। भारत की आकाश मिसाइल प्रणाली या ब्रह्मोस जैसी तकनीकों ने दुनिया भर का ध्यान खींचा है। टीआर हैबर का दावा है कि इन मिसाइलों की संभावित खरीद को लेकर बातचीत एजेंडे में शामिल है। अब तुर्की की चिंता का असली कारण क्या है? वो भी समझ लीजिए। देखिए तुर्की और साइपरस के बीच दशकों से विवाद चला आ रहा है। तुर्की ने उत्तरी साइपरस पर कब्जा जमा रखा है जिसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त नहीं है। ऐसे में साइप्रस अगर भारत जैसे वैश्विक शक्ति के साथ रक्षा समझौता कर लेता है तो यह तुर्की के लिए एक बड़ा सामरिक झटका होगा और टीआर हैबर अपनी रिपोर्ट में संकेत देता है कि भारत का यह कदम ना केवल रक्षा के लिहाज से बल्कि भू राजनीति के लिहाज से भी तुर्की को चुनौती देने जैसा है। भारत अब खुलकर उन देशों के साथ हाथ मिला रहा है जिनका तुर्की के साथ तनाव है। खैर टीआर हैबर के हवाले से आई यह खबर बताती है कि भारत की विदेश नीति अब केवल रक्षात्मक नहीं रही है बल्कि वह सक्रिय रूप से अपने रक्षा उत्पादों के लिए नए बाजार और नए साझेदार तलाश कर रही है। 
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