स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर योग गुरु बाबा रामदेव ने देश की शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक और सरकारी नौकरियों में फैले भ्रष्टाचार पर खुलकर अपनी बात रखी। एक हालिया वीडियो में उन्होंने वर्तमान व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाते हुए सिस्टम को जल्द से जल्द सुधारने की चेतावनी दी है।
शिक्षा व्यवस्था और बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव
बाबा रामदेव ने स्कूलों और कॉलेजों की बदहाली पर चिंता जताते हुए कहा कि आज देश भर में चारों तरफ हंगामा है। छात्रों को कई बुनियादी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है:
- बुनियादी सुविधाएं नदारद: शिक्षण संस्थानों में बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं नहीं हैं।
- शिक्षकों और किताबों की कमी: स्कूलों में अगर शिक्षक मौजूद हैं, तो किताबें नहीं हैं; और अगर किताबें उपलब्ध हैं, तो पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं।
पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली पर उठे सवाल
देश में परीक्षाओं की पारदर्शिता पर निशाना साधते हुए रामदेव ने कहा कि सरेआम नकल हो रही है और प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं आम हो चुकी हैं।
- उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षा के अंकों का अब कोई खास मोल नहीं रह गया है, क्योंकि आगे विश्वविद्यालयों में दाखिला पूरी तरह से कॉम्पिटिटिव एग्जाम्स (Competitive Exams) पर निर्भर करता है।
- इन प्रतियोगी परीक्षाओं में भी भ्रष्टाचार और पेपर लीक ने योग्य छात्रों के भविष्य को खतरे में डाल दिया है।
सरकारी नौकरियों के इंटरव्यू में 90 से 99% तक घोटाला
सबसे गंभीर आरोप लगाते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में भारी धांधली चल रही है:
- जाति और विचारधारा के आधार पर चयन: सरकारी जॉब्स के इंटरव्यू में 90 से 99 प्रतिशत तक घोटाला हो रहा है। इंटरव्यू लेने वाले अक्सर अपने ही संस्कार, संगठन, जाति या वर्ग के लोगों को चुन लेते हैं, जबकि योग्य उम्मीदवारों को बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।
- करोड़ों की रिश्वतखोरी: उन्होंने दावा किया कि इंटरव्यू में उम्मीदवार पहले से ही तय होते हैं। इसके लिए 25-50 लाख रुपये से लेकर 1-1 करोड़ रुपये तक की भारी रिश्वत ली जाती है।
- उन्होंने इसे लोकतंत्र और न्याय के खिलाफ एक बहुत ही अपमानजनक कृत्य बताया।
चेतावनी: “तरीके सुधारें, वरना उग्र होंगे आंदोलन”
बाबा रामदेव ने व्यवस्था चलाने वालों को सीधी चेतावनी देते हुए कहा, “देश में घपला बहुत है, इसे ठीक कर लो।” उन्होंने स्पष्ट किया कि वह किसी भी तरह की अराजकता (Anarchy) के समर्थक नहीं हैं, लेकिन अगर हालात ऐसे ही रहे, तो विरोध प्रदर्शन और भी उग्र हो जाएंगे। उन्होंने यहां तक कह दिया कि अगर चीजें नहीं सुधारी गईं, तो ऐसा न हो कि बाबा रामदेव को दोबारा आंदोलन के लिए सड़क पर उतरना पड़े।


