गाजियाबाद। मुख्यमंत्री के निर्देशों और निर्बाध बिजली आपूर्ति के दावों के बावजूद गाजियाबाद में बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। विद्युत निगम की आधिकारिक रिपोर्ट और उपभोक्ताओं के अनुभवों के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। जहां एक ओर निगम शासन को भेजी गई रिपोर्ट में प्रतिदिन केवल 28 मिनट बिजली आपूर्ति बाधित होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर शहरवासी रोजाना 6 से 7 घंटे तक बिजली कटौती झेलने को मजबूर हैं।
गाजियाबाद शहर को ‘नो ट्रिपिंग जोन’ घोषित किया गया है, जिसके तहत यहां 24 घंटे निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जानी चाहिए। विद्युत निगम के अनुसार शहर में प्रतिदिन 23 घंटे 32 मिनट बिजली उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि जमीनी स्थिति इससे बिल्कुल विपरीत दिखाई दे रही है। विभागीय दावों की तुलना में वास्तविक कटौती 15 गुना से अधिक बताई जा रही है।
शुक्रवार रात और शनिवार दिनभर शहर के कई इलाकों में अंधाधुंध बिजली कटौती दर्ज की गई। भोपुरा, डिफेंस कॉलोनी, इंद्रप्रस्थ कॉलोनी, शालीमार गार्डन, वसुंधरा, श्याम पार्क, साहिबाबाद, लोनी, खोड़ा समेत शहर की अधिकांश कॉलोनियों के निवासी भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट से परेशान रहे। ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में जनरेटर बैकअप के कारण आपूर्ति बनी रही, लेकिन इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ सीधे निवासियों पर पड़ रहा है।
तहसील और कस्बों में भी हालात चिंताजनक
विद्युत निगम तहसील स्तर पर 23 घंटे 8 मिनट बिजली आपूर्ति का दावा कर रहा है, लेकिन उपभोक्ताओं के अनुसार बार-बार फॉल्ट और ट्रिपिंग के कारण कई क्षेत्रों में 8 से 10 घंटे तक बिजली बाधित हो रही है। मुरादनगर और मोदीनगर जैसे कस्बों में स्थिति विशेष रूप से गंभीर बनी हुई है।
गांवों में निर्धारित आपूर्ति से कई घंटे कम बिजली
ग्रामीण क्षेत्रों में संकट और अधिक गहरा है। जहां सरकार की ओर से गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति निर्धारित है, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन केवल 14 से 15 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। विद्युत निगम हालांकि 17 घंटे 28 मिनट आपूर्ति का दावा कर रहा है। लगातार कटौती से ग्रामीणों के साथ-साथ किसानों को भी सिंचाई और दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।ग्रामीण क्षेत्रों में संकट और अधिक गहरा है। जहां सरकार की ओर से गांवों में 18 घंटे बिजली आपूर्ति निर्धारित है, वहीं स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें प्रतिदिन केवल 14 से 15 घंटे ही बिजली मिल पा रही है। विद्युत निगम हालांकि 17 घंटे 28 मिनट आपूर्ति का दावा कर रहा है। लगातार कटौती से ग्रामीणों के साथ-साथ किसानों को भी सिंचाई और दैनिक कार्यों में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर बना बड़ी चुनौती
विशेषज्ञों और विभागीय सूत्रों के अनुसार, जिले में बिजली संकट की प्रमुख वजह पुरानी विद्युत लाइनें, ओवरलोडेड फीडर और क्षमता से अधिक दबाव झेल रहे ट्रांसफार्मर हैं। कमजोर वितरण व्यवस्था के कारण रोजाना औसतन 250 से 300 छोटे-बड़े फॉल्ट दर्ज किए जा रहे हैं, जिससे आपूर्ति बार-बार बाधित हो रही है।
बिजली कटौती से बढ़ीं आमजन की मुश्किलें
लगातार बिजली बाधित रहने से आम नागरिकों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है—
- भीषण गर्मी में लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है।
- बहुमंजिला इमारतों में लिफ्ट फंसने का खतरा बढ़ गया है।
- उद्योगों में उत्पादन प्रभावित होने से उत्पाद लागत बढ़ रही है।
- कई कॉलोनियों में जलापूर्ति बाधित हो रही है।
- जनरेटर पर निर्भरता बढ़ने से लोगों की आर्थिक लागत बढ़ रही है।
- अंधेरे के कारण अपराधिक घटनाओं की आशंका भी बढ़ गई है।
बिजली आपूर्ति को लेकर विभागीय दावों और वास्तविकता के बीच यह अंतर प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में उपभोक्ताओं की मांग है कि केवल कागजी रिपोर्टों के बजाय जमीनी स्तर पर बिजली व्यवस्था को मजबूत करने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाएं।


