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Tuesday, August 4, 2026
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‘साली ने सपने में महसूस की छेड़छाड़’, 7 साल बाद वायुसेना का जवान बरी, करियर और सम्मान को पहुंची चोट

उत्तर प्रदेश के कानपुर की एक विशेष पॉक्सो (POCSO) अदालत ने एक बेहद अजीबोगरीब मामले में वायुसेना के जवान अनुराग शुक्ला को छेड़छाड़ के आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत का यह फैसला कथित पीड़िता के उस चौंकाने वाले बयान के बाद आया, जिसमें उसने कहा कि छेड़छाड़ की घटना असलियत में नहीं, बल्कि उसके “सपने में हुई थी”। हालांकि इस मामले में वायुसेना के जवान को 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे।
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बचाव पक्ष के वकील करीम अहमद सिद्दीकी ने बुधवार को बताया कि 15 साल की एक लड़की ने आरोप लगाया था कि आठ मार्च 2019 को नौबस्ता के खाड़ेपुर में बहन के ससुराल में उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उससे कथित तौर पर छेड़छाड़ की जब वह सो रही थी।
उन्होंने बताया कि लड़की के आरोपों के आधार पर लगभग पांच महीने बाद तीन अगस्त 2019 को नौबस्ता थाने में यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी और जमानत मिलने से पहले शुक्ला को 19 दिन जेल में बिताने पड़े थे।
सिद्दीकी ने बताया कि मामले की सुनवाई के दौरान लड़की ने अदालत को बताया कि वह ‘एंटीबायोटिक’ दवाएं ले रही थी और घटना वाली रात वह अर्द्धबेहोशी की हालत में थी तभी उसे ‘‘सपने में महसूस’’ हुआ कि उसके जीजा अनुराग शुक्ला ने उसे पकड़ लिया और उससे छेड़छाड़ की, जिसके बाद वह डरकर जाग गई और शोर मचा दिया।
उन्होंने बताया कि लड़की के पिता और बड़ी बहन ने भी अदालत को बताया कि शुक्ला के खिलाफ शिकायत गलतफहमी में दर्ज कराई गई थी।
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सिद्दीकी ने बताया कि विशेष पॉक्सो अदालत की न्यायाधीश रश्मि सिंह ने सात मार्च को शुक्ला को बरी कर दिया, जिससे सात साल की कानूनी लड़ाई खत्म हो गई।
शुक्ला ने फोन पर ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि उसके खिलाफ तीन अगस्त 2019 को प्राथमिकी दर्ज की गई थी और उन्हें उसी वर्ष 29 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था।
उन्होंने कहा कि 17 अक्टूबर को जमानत मिलने से पहले उन्हें 19 दिन जेल में बिताने पड़े।

शुक्ला ने कहा कि इस मुकदमे की वजह से उन्हें बहुत मानसिक तनाव हुआ और उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा तथा करियर की संभावनाओं को नुकसान पहुंचा।
उन्होंने दावा किया कि इस मुकदमे के कारण वह 2020 में कॉर्पोरल के पद पर प्रोन्नति नहीं पा सके और उन्हें ‘लीडिंग एयरक्राफ्टमैन’ के तौर पर ही काम करना पड़ा।
शुक्ला ने यह भी आरोप लगाया, ‘‘मुझे इस मामले में झूठा फंसाया गया, क्योंकि मेरे ससुर विजय तिवारी चाहते थे कि मैं अपनी जमीन, घर और दूसरी संपत्ति अपनी पत्नी और साली के नाम कर दूं।

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