बलिया, उत्तर प्रदेश: जनपद के नवानगर ब्लॉक स्थित सिवानकला ग्रामसभा में ग्राम निधि गबन के पुराने मामले में न्यायालय ने सख्त रुख अपनाया है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) न्यायालय ने पूर्व ग्राम प्रधान और तत्कालीन ग्राम सचिव सहित कुल सात आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
29.50 लाख रुपये की निकासी पर उठे थे सवाल
यह मामला वर्ष 2014 का है, जब ग्राम पंचायत के प्रथम खाते से लगभग 29.50 लाख रुपये की बड़ी रकम निकाली गई थी। ग्रामीणों ने इस धन के उपयोग को लेकर अनियमितता और गड़बड़ी की शिकायत प्रशासन से की थी। आरोप था कि विकास कार्यों के नाम पर धन निकाला गया, लेकिन कई कार्य जमीन पर नजर नहीं आए।
जांच में सामने आई अनियमितताएं
शिकायत के बाद जिला प्रशासन द्वारा कराई गई जांच में ग्राम निधि के उपयोग में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच रिपोर्ट के आधार पर सिकंदरपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
इन धाराओं में दर्ज हुआ केस
पुलिस ने तत्कालीन ग्राम प्रधान सतेंद्र राजभर, ग्राम सचिव सतीश राम समेत सात लोगों के खिलाफ
- आपराधिक विश्वासघात
- धोखाधड़ी
- आपराधिक साजिश
- सबूत मिटाने
जैसी गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया था।
कोर्ट में गैरहाजिरी पड़ी भारी
मामले की सुनवाई के दौरान आरोपितों की लगातार गैरहाजिरी को न्यायालय ने गंभीरता से लिया। इसके चलते सभी आरोपियों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी कर दिया गया है।
पुलिस ने शुरू की कार्रवाई
थाना प्रभारी मूलचंद चौरसिया के अनुसार, न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जल्द ही सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया जाएगा।
निष्कर्ष
ग्राम निधि में गबन जैसे मामलों में न्यायालय की यह सख्ती एक बड़ा संदेश है कि सार्वजनिक धन के दुरुपयोग पर कानून का शिकंजा कसना तय है। अब देखना होगा कि पुलिस कब तक सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करती है।


