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Sunday, September 20, 2026
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एहसान फरामोश निकला ताइवान! पहले ली मदद, फिर दिया भारत को धोखा

जिस ताइवान को भारत ने हमेशा चीन के दबाव के खिलाफ डिप्लोमेटिक सपोर्ट दिया। आज उसी ताइवान में आपको बता दें कि भारतीयों के खिलाफ पोस्टर लगाए जा रहे हैं। पोस्टर में भारत का झंडा उल्टा दिखाया गया। एक भारतीय आदमी को पगड़ी में दिखाया गया और इतना ही नहीं बड़े अक्षरों में लिखा गया इंडियंस डोंट कम हियर। यानी अब इंडियंस के खिलाफ भारतीयों के खिलाफ नफरत ताइवान में साफ नजर आ रही है और यह सीधा चुनावी मुद्दा यहां पर बन गया है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या ताइवान भी अब भारत विरोधी राजनीति से वोट बटोरना चाहता है क्योंकि यह कोई आइसोलेटेड घटना नहीं है। साल 2023 में भी ताइवान में भारतीय वर्कर्स के खिलाफ प्रोटेस्ट हुए। सोशल मीडिया पर कैंपेन चलाया गया। इंडियंस डोंट कम हियर। यह सब तब हुआ जब ताइवान खुद भारत से 1 लाख स्किल्ड वर्कर्स बुलाने की तैयारी कर रहा था।

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ताइवान को भारतीय इंजीनियर्स चाहिए। भारतीय वर्कर्स चाहिए, भारतीय टैलेंट चाहिए। लेकिन सवाल ऐसे में यह उठ रहा है कि क्या भारतीय वर्कर्स को लेकर ताइवान के एक हिस्से में असहजता बढ़ रही है? बता दें कि ताइवान की सबसे बड़ी समस्या यह है कि उसकी आबादी लगातार घट रही है। जापान, साउथ कोरिया और चीन की तरह ताइवान में भी फर्टिलिटी रेट तेजी से गिर रहा है। काम करने वाले लोग कम पड़ रहे हैं। आबादी कम पड़ रही है और इसी वजह से उन्हें बाहर से वर्कर्स चाहिए। और सबसे बड़ा विकल्प कौन है ताइवान के पास में वो है भारत। लेकिन भारतीयों को लेकर जिस तरह का रेसिज्म यहां पर खुलकर सामने आ रहा है, उसने भारत में भी नाराजगी बढ़ा दी है। सबसे हैरानी की बात तो यह है कि जिस समय चीन लगातार ताइवान पर दबाव बढ़ा रहा है, उसी समय भारत जैसे संभावित पार्टनर के लोगों को टारगेट करना ताइवान के लिए रणनीतिक गलती भी माना जा रहा है। 

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ताइवान सरकार के वरिष्ठ अधिकारी जोसेफ व्यू ने खुद इस कैंपेन की आलोचना की। उन्होंने यह कहा कि कुछ लोकल नेता सिर्फ अटेंशन पाने के लिए यह सब कुछ कर रहे हैं। लेकिन सवाल अब भी यह है कि अगर सरकार गंभीर है तो फिर बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं और क्यों हो रही है? याद कीजिए कुछ समय पहले ताइवान के एक मंत्री ने यह कहा था कि उन्हें भारत से खासतौर पर नॉर्थ ईस्ट इंडियन वर्कर्स चाहिए क्योंकि उनका स्किन कलर ताइवानी लोगों जैसा है। सोचिए 2026 में भी इंसानों के स्किन कलर के आधार पर उन्हें जज किया जा रहा है और यही सबसे खतरनाक बात है क्योंकि ऑनलाइन शुरू हुई नफरत धीरे-धीरे रियल लाइफ में उतरने लगती है।
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