अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश में जारी बिजली संकट को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में चल रही “असहनीय बिजली संकट” की स्थिति के लिए बिजली विभाग के कनिष्ठ कर्मचारी या लाइनमैन जिम्मेदार नहीं हैं, इसलिए जनता अपना गुस्सा उन पर न निकाले।
अखिलेश यादव ने कहा कि बिजली विभाग के हजारों संविदा कर्मचारियों की छंटनी के बाद कर्मचारी पहले से ही भारी दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इस “महा विद्युत आपदा” के लिए भाजपा सरकार, बिजली मंत्री, सांसद, विधायक, मेयर, पार्षद, विभाग के उच्चाधिकारी और भ्रष्ट ठेकेदार जिम्मेदार हैं।
“भाजपा सरकार ने बिजली व्यवस्था ठप्प कर दी”
सपा प्रमुख ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नई बिजली मांग को पूरा करने के लिए न तो नए पावर प्लांट लगा पाई है, न ट्रांसमिशन व्यवस्था मजबूत की गई है और न ही डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम में सुधार हुआ है। उन्होंने स्मार्ट मीटर योजना को भी “महाभ्रष्टाचार” बताते हुए कहा कि इससे आम जनता की परेशानियां और बढ़ी हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि बिजली कटौती और अव्यवस्था की शिकायत करने वाले लोगों को भाजपा समर्थकों द्वारा धमकाया जा रहा है और कई मामलों में शिकायतकर्ताओं पर एफआईआर तक दर्ज की जा रही है।
अस्पतालों और आम जनता की बढ़ी परेशानी
अखिलेश यादव ने कहा कि लगातार बिजली कटौती के कारण अस्पतालों तक में संकट की स्थिति बनी हुई है। महंगे डीज़ल के कारण जनरेटर चलाना भी कठिन हो गया है, जिससे मरीजों और आम नागरिकों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
जनता से सावधानी बरतने की अपील
अपने संदेश में उन्होंने लोगों से अपील की कि घर के बुजुर्गों, बीमारों और बच्चों का विशेष ध्यान रखें। उन्होंने सलाह दी कि बिजली आते ही मोबाइल चार्ज कर लें, टॉर्च तैयार रखें और पानी भरकर रखें क्योंकि बिजली संकट का सीधा असर पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ता है।
इसके साथ ही उन्होंने लोगों को अंधेरे में चोरी या असामाजिक गतिविधियों से सतर्क रहने और पशुओं का भी विशेष ध्यान रखने की सलाह दी।
राज्य में बढ़ती गर्मी और लगातार बिजली कटौती के बीच अखिलेश यादव का यह बयान राजनीतिक माहौल को और गरमा सकता है। भाजपा की ओर से इस बयान पर फिलहाल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।


