अलीगढ़, उत्तर प्रदेश: अलीगढ़ से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां करीब 10 महीने से लापता चल रहे भाजपा नेता विपिन चंचल वाल्मीकि को नगर निगम का पार्षद मनोनीत कर दिया गया। इस घटना ने प्रशासनिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक निर्णयों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
21 मई 2025 से लापता हैं विपिन
जानकारी के अनुसार, विपिन चंचल वाल्मीकि 21 मई 2025 से लापता हैं। उनकी गुमशुदगी की रिपोर्ट सासनी गेट थाना में दर्ज कराई गई थी। पुलिस तब से लगातार उनकी तलाश कर रही है, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है।
परिवार का कहना है कि उन्होंने हर संभव जगह तलाश की, पोस्टर लगवाए और अधिकारियों से गुहार लगाई, लेकिन विपिन का कोई पता नहीं चल सका।
मां की गुहार, सिस्टम पर सवाल
विपिन की मां पिछले 10 महीनों से थाने और पुलिस कंट्रोल रूम के चक्कर काट रही हैं। उनका कहना है कि उन्होंने कई बार अधिकारियों से बेटे को ढूंढने की अपील की, लेकिन अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिला है।
यह मामला उस वक्त और गंभीर हो गया जब नगर निगम द्वारा जारी 10 नामित पार्षदों की सूची में विपिन का नाम शामिल कर लिया गया।
नगर निगम सूची में नाम शामिल होने से मचा हड़कंप
हाल ही में अलीगढ़ नगर निगम द्वारा जारी नामित पार्षदों की सूची में विपिन का नाम शामिल होने के बाद पूरे शहर में चर्चा तेज हो गई। एक तरफ पुलिस उन्हें ढूंढ रही है, वहीं दूसरी तरफ उन्हें पार्षद बनाने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है।
इस विरोधाभासी स्थिति ने प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है।
उठ रहे बड़े सवाल
इस पूरे मामले ने कई अहम सवाल खड़े कर दिए हैं:
- क्या पार्षद नियुक्ति से पहले बैकग्राउंड वेरिफिकेशन नहीं किया गया?
- क्या राजनीतिक प्रक्रिया में स्थानीय प्रशासन से समन्वय की कमी है?
- क्या यह सिर्फ एक चूक है या सिस्टम में बड़ी खामी का संकेत?
निष्कर्ष
अलीगढ़ का यह मामला न सिर्फ प्रशासनिक प्रक्रियाओं की पारदर्शिता पर सवाल उठाता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि राजनीतिक निर्णय लेते समय जमीनी हकीकत को नजरअंदाज किया जा सकता है। अब देखना होगा कि इस विवाद के बाद संबंधित विभाग क्या कार्रवाई करता है और लापता नेता का कोई सुराग मिल पाता है या नहीं।


