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Tuesday, August 4, 2026
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Bengal Politics में बड़ा फेरबदल, Governor C. V. Ananda Bose का इस्तीफा, R. N. Ravi होंगे नए राज्यपाल?

पश्चिम बंगाल की राजनीति में गुरुवार को अचानक हलचल तब बढ़ गई जब राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने नई दिल्ली में अपना इस्तीफा सौंपा है। बताया जा रहा है कि आगामी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह फैसला लिया गया, जिससे राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है।
समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक जब उनसे इस्तीफे के बारे में पूछा गया तो उन्होंने संक्षिप्त प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्होंने राज्यपाल के पद पर पर्याप्त समय बिताया है। बता दें कि सी. वी. आनंद बोस को नवंबर 2022 में केंद्र सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल का राज्यपाल नियुक्त किया गया था और तब से वह इस पद पर कार्य कर रहे थे।
गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल में राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच कई मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति भी सामने आती रही है। कई बार प्रशासनिक और राजनीतिक मामलों को लेकर राजभवन और राज्य सरकार के बीच बयानबाजी भी चर्चा का विषय बनी रही है।
इसी बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दी है। मौजूद जानकारी के अनुसार उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उन्हें फोन कर जानकारी दी कि आर. एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया राज्यपाल नियुक्त किया जा रहा है।
ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए कहा कि राज्यपाल सी. वी. आनंद बोस के अचानक इस्तीफे की खबर से वह हैरान और चिंतित हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उन्हें इस्तीफे के पीछे के कारणों की जानकारी नहीं है, लेकिन मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को देखते हुए इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि उन पर कुछ दबाव डाला गया हो।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में यह भी कहा कि अगर किसी राजनीतिक उद्देश्य से चुनाव से पहले ऐसा कदम उठाया गया है तो यह गंभीर चिंता का विषय हो सकता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि नए राज्यपाल की नियुक्ति के बारे में उन्हें पहले से कोई औपचारिक परामर्श नहीं दिया गया।
गौरतलब है कि भारतीय संविधान की परंपरा के अनुसार कई मामलों में राज्य सरकार से औपचारिक बातचीत या जानकारी साझा करने की परंपरा का पालन किया जाता रहा है। हालांकि राज्यपाल की नियुक्ति का अधिकार केंद्र सरकार के पास होता है।
ममता बनर्जी ने अपने बयान में कहा कि इस तरह के फैसले सहकारी संघवाद की भावना को कमजोर कर सकते हैं और इससे राज्यों की गरिमा पर असर पड़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि संघीय ढांचे और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।
अब राजनीतिक हलकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि आगामी विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल पद में बदलाव का क्या असर राज्य की राजनीति पर पड़ सकता है।
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