गाजियाबाद में एक दर्दनाक हादसे ने नगर निगम और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंदिर दर्शन के लिए निकले कारोबारी शंकरलाल गर्ग की खुले नाले में गिरने से मौत हो गई। बताया जा रहा है कि उनकी स्कूटी अचानक अनियंत्रित होकर फिसल गई और वे सड़क किनारे बने असुरक्षित नाले में जा गिरे।
स्थानीय लोगों के अनुसार, हादसे वाली जगह पर न तो पर्याप्त रोशनी थी और न ही नाले को ढकने या बैरिकेडिंग की कोई व्यवस्था थी।
ब्लैक स्पॉट चिन्हित, फिर भी सुधार नहीं
हाल ही में जिला प्रशासन द्वारा सड़क किनारे मौजूद दुर्घटना संभावित स्थानों (ब्लैक स्पॉट्स) की पहचान की गई थी। जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को तत्काल सुधार के निर्देश भी दिए थे।
लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कई स्थानों पर खुले नाले, टूटी सड़कों और अधूरी सुरक्षा व्यवस्थाओं के कारण लोगों की जान जोखिम में बनी हुई है।
नगर निगम और प्रशासन पर लापरवाही के आरोप
स्थानीय नागरिकों और सामाजिक संगठनों का आरोप है कि नगर निगम चेतावनियों और पिछली घटनाओं से कोई सबक नहीं ले रहा। नोएडा में हाल ही में हुए हादसे के बाद भी सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा नहीं की गई।
नगर निगम फिलहाल मामले में सीधे तौर पर लापरवाही स्वीकार करने से बचता नजर आ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, आंतरिक जांच की बात कही जा रही है, लेकिन अब तक जिम्मेदारी तय नहीं हो सकी है।
स्थानीय लोगों की मांग
- खुले नालों को तत्काल ढका जाए
- सड़क किनारे पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाई जाए
- खतरनाक स्थानों पर बैरिकेडिंग की जाए
- जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई हो
क्या प्रशासन लेगा सबक?
यह हादसा एक बार फिर शहरी अव्यवस्था और निगरानी तंत्र की कमजोरियों को उजागर करता है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस घटना के बाद ठोस कार्रवाई करेगा या फिर यह मामला भी फाइलों में सिमटकर रह जाएगा?


