नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राष्ट्र की प्रगति और कल्याण के लिए सामूहिक शक्ति और संकल्प के महत्व को रेखांकित करते हुए एक संस्कृत सुभाषितम् साझा किया। उन्होंने कहा कि भारतवासियों की असीम शक्ति ही देश के विकास की असली धुरी है और परस्पर विश्वास के बल पर देश ने हर संकल्प को साकार किया है।
प्रधानमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (Twitter) पर यह संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए लिखा—
“स्वस्ति पन्थामनुचरेम सूर्याचन्द्रमसाविव।
पुनर्ददाताघ्नता जानता सङ्गमेमहि॥”
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में कहा कि भारत के लोगों की असीम शक्ति और सामूहिक संकल्प ही देश की प्रगति का आधार है। उन्होंने कहा कि अपने सामर्थ्य और आपसी विश्वास के बल पर देश ने अब तक हर लक्ष्य को प्राप्त किया है और आगे भी इसी एकजुटता के साथ नए संकल्पों को पूरा करता रहेगा।
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए इस सुभाषितम् का अर्थ है कि हमें सूर्य और चंद्रमा की तरह निरंतर शुभ मार्ग पर चलते रहना चाहिए। साथ ही, समाज में अहिंसा, सद्भाव और ज्ञान के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए ताकि एक-दूसरे के सहयोग से राष्ट्र की उन्नति और जनकल्याण सुनिश्चित किया जा सके।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब देशवासी मिलकर काम करते हैं तो हर चुनौती का समाधान संभव हो जाता है और राष्ट्र विकास के मार्ग पर तेजी से आगे बढ़ता है।


