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Tuesday, August 4, 2026
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Prabhasakshi NewsRoom: ग्वालियर, नासिक के बाद अब Karbi Anglong में Sukhoi-30MKI Crash, प्रशिक्षण अभियानों के दौरान सुरक्षा पर उठे सवाल

असम के कार्बी आंगलोंग जिले में भारतीय वायु सेना का एक उन्नत युद्धक विमान प्रशिक्षण अभियान के दौरान दुर्घटनाग्रस्त हो गया। इस दुर्घटना में विमान में सवार दो पायलटों की मृत्यु हो गयी। वायु सेना ने इसकी पुष्टि करते हुए बताया है कि स्क्वॉड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर ने इस हादसे में अपने प्राण गंवा दिये।
जानकारी के अनुसार यह दो सीट वाला सुखोई तीस एमकेआई युद्धक विमान असम के जोरहाट स्थित वायु सेना अड्डे से गुरुवार शाम प्रशिक्षण अभियान के लिए उड़ा था। जोरहाट पूर्वोत्तर क्षेत्र में वायु सेना के सबसे महत्वपूर्ण अग्रिम अड्डों में से एक माना जाता है। विमान ने उड़ान भरने के बाद नियमित प्रशिक्षण उड़ान जारी रखी, लेकिन शाम 7 बजकर 42 मिनट पर नियंत्रण कक्ष से उसका अंतिम संपर्क दर्ज किया गया। इसके तुरंत बाद राडार से विमान का संपर्क टूट गया।

इसे भी पढ़ें: Sukhoi Su-30MKI Fighter Jet Crashes | असम में वायुसेना का सुखोई Su-30MKI दुर्घटनाग्रस्त, दो पायलट शहीद, वायुसेना ने की पुष्टि

राडार से संपर्क टूटने के बाद वायु सेना ने तुरंत खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया। विमान के संभावित मार्ग के आधार पर खोज दलों को करबी आंगलोंग जिले के पहाड़ी और घने वन क्षेत्र में भेजा गया। यह इलाका दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के कारण खोज अभियान के लिए कठिन माना जाता है। स्थानीय पुलिस के अनुसार बोखाजन उपविभाग के आसपास रहने वाले लोगों ने रात में तेज धमाके की आवाज सुनी थी, जिससे विमान दुर्घटना की आशंका और मजबूत हो गयी।
बचाव दलों को रात भर कठिन पहाड़ी मार्गों से पैदल चलकर खोज अभियान चलाना पड़ा। अंततः शुक्रवार तड़के लगभग एक बजे के आसपास दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा जंगलों के बीच खोज लिया गया। मलबे के पास ही दोनों पायलटों के शव मिले, जिनकी पहचान स्क्वॉड्रन लीडर अनुज और फ्लाइट लेफ्टिनेंट पुरवेश दुरागकर के रूप में की गयी।
भारतीय वायु सेना ने अपने आधिकारिक वक्तव्य में कहा कि इस दुर्घटना में दोनों पायलटों को गंभीर चोटें आयीं और उन्होंने अपने प्राण गंवा दिये। बयान में कहा गया है कि वायु सेना के सभी अधिकारी और जवान इस कठिन समय में शोक संतप्त परिवारों के साथ खड़े हैं और दिवंगत पायलटों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। फिलहाल इस दुर्घटना के कारणों का पता नहीं चल पाया है। वायु सेना ने हादसे की जांच के आदेश दे दिये हैं ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना तकनीकी खराबी, मौसम की स्थिति या किसी अन्य कारण से हुई।
देखा जाये तो सुखोई तीस एमकेआई भारतीय वायु सेना का सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली युद्धक विमान माना जाता है। यह लंबी दूरी तक मार करने वाला बहु भूमिका युद्धक विमान है जिसे रूस की सुखोई कंपनी ने विकसित किया है और भारत में हिंदुस्तान वैमानिकी लिमिटेड द्वारा लाइसेंस के तहत निर्मित किया जाता है। वर्तमान में वायु सेना के बेड़े में ऐसे 260 से अधिक विमान शामिल हैं और इन्हें वायु सेना की युद्धक क्षमता की रीढ़ माना जाता है।
इस दुर्घटना ने एक बार फिर प्रशिक्षण अभियानों के दौरान सुरक्षा के सवालों को सामने ला दिया है। पिछले कुछ वर्षों में भी इस प्रकार की घटनाएं सामने आयी हैं। 2023 में ग्वालियर के पास एक सुखोई विमान उड़ान भरने के तुरंत बाद दुर्घटनाग्रस्त हो गया था, जबकि 2024 में महाराष्ट्र के नासिक जिले में भी एक सुखोई विमान हादसे का शिकार हुआ था। अब असम में हादसा हो गया।
सामरिक दृष्टि से यह घटना इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि असम और पूर्वोत्तर क्षेत्र भारत की सुरक्षा व्यवस्था में अत्यंत अहम भूमिका निभाते हैं। यह इलाका चीन और म्यांमार की सीमाओं के निकट है और यहां से वायु सेना पूर्वी सीमा की निगरानी और त्वरित सैन्य प्रतिक्रिया सुनिश्चित करती है। जोरहाट जैसे अग्रिम वायु अड्डे से संचालित युद्धक विमान सीमावर्ती क्षेत्रों में संतुलन बनाए रखने और किसी भी संभावित खतरे का तुरंत जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
ऐसे में प्रशिक्षण अभियान भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं क्योंकि इनके माध्यम से पायलट कठिन परिस्थितियों में युद्धक विमानों के संचालन का अभ्यास करते हैं। बहरहाल, इस दुर्घटना में दो अनुभवी पायलटों की शहादत भारतीय वायु सेना के लिए बड़ी क्षति है।
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