गाजियाबाद में पर्यावरणीय लापरवाही का बड़ा मामला सामने आया है। शहर के प्रमुख हरित क्षेत्र साईं उपवन में हजारों पेड़ सूखकर नष्ट हो गए हैं। करीब 200 एकड़ में फैले इस इलाके की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (NGT) को स्वतः संज्ञान लेना पड़ा है।
NGT ने इस मामले में भारत की केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और संबंधित स्थानीय निकायों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। ट्रिब्यूनल ने पूछा है कि इतने बड़े पैमाने पर पेड़ों के सूखने के बावजूद अब तक क्या कदम उठाए गए और आगे पर्यावरण संरक्षण के लिए क्या योजना है।
साईं उपवन को कभी शहर के “ग्रीन लंग्स” यानी शहरी वन के रूप में विकसित किया गया था। यहां बड़ी संख्या में पेड़ लगाए गए थे ताकि प्रदूषण से जूझ रहे शहर को राहत मिल सके। लेकिन पिछले करीब 13 वर्षों में यह क्षेत्र कचरा डंपिंग और प्रदूषण का केंद्र बनता गया।
याचिका में आरोप लगाया गया है कि यहां अनियंत्रित रूप से कूड़ा डाला गया, कई स्थानों पर कचरा जलाया गया और सीवेज का पानी भी छोड़ा गया। इन कारणों से मिट्टी और जल प्रदूषण बढ़ा, जिससे करीब 70,000 पेड़ सूखकर खत्म हो गए।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े हरित क्षेत्र के नष्ट होने से शहर की वायु गुणवत्ता पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। साथ ही गर्मी के मौसम में तापमान बढ़ने और जैव विविधता घटने की आशंका भी जताई जा रही है।
NGT के हस्तक्षेप के बाद अब उम्मीद है कि संबंधित विभाग क्षेत्र की सफाई, प्रदूषण नियंत्रण और बड़े स्तर पर पुनः पौधारोपण अभियान शुरू करेंगे, ताकि साईं उपवन को फिर से हरित क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा सके।


