मोदीनगर। पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने, आरोपियों के खिलाफ प्रभावी कानूनी कार्रवाई और पुलिस की कथित लचर कार्यप्रणाली के विरोध में गुरुवार को मोदीनगर थाने के बाहर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन धरना प्रशासन के आश्वासन के बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया। आंदोलनकारियों ने स्पष्ट किया कि धरना स्थगित हुआ है, लेकिन संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है।

सुबह से ही धरनास्थल पर बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक, राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता, सभासद, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और कश्यप समाज के लोग जुटते रहे। आंदोलनकारियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन की ओर से वार्ता का प्रस्ताव रखा गया।
प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच करीब आधे घंटे चली वार्ता
प्रशासन के प्रस्ताव के बाद आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल और अधिकारियों के बीच मोदीनगर थाने में करीब आधे घंटे तक वार्ता हुई। इस दौरान आंदोलनकारियों ने पुलिस की अब तक की कार्रवाई पर सवाल उठाए।

आंदोलनकारियों का आरोप था कि पीड़ित महिलाओं के मामले में पुलिस का रवैया कथित तौर पर लचर रहा है। उन्होंने पुलिस पर राजनीतिक दबाव में काम करने की आशंका जताते हुए जल्द और निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की।
BNS और IT Act समेत उचित धाराओं में कार्रवाई की मांग
देवव्रत धामा और सुनील शर्मा ने कहा कि महिलाओं के साथ कथित मारपीट और अभद्रता के मामले में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। आंदोलनकारियों ने पुलिस-प्रशासन से मामले के तथ्यों के आधार पर अंग-भंग से संबंधित धाराओं, आईटी एक्ट और BNS की धारा 129 समेत सभी लागू कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने कहा कि पीड़ित महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए पुलिस को मामले में प्रभावी और निष्पक्ष कार्रवाई करनी चाहिए।

प्रशासन के आश्वासन के बाद फिलहाल स्थगित हुआ धरना
वार्ता के दौरान प्रशासन की ओर से आंदोलनकारियों की मांगों पर कार्रवाई का आश्वासन दिया गया। इसके बाद देवव्रत धामा, सुनील शर्मा और सभासदों ने धरना फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की।
हालांकि, आंदोलनकारियों ने साफ किया कि इसे आंदोलन की समाप्ति नहीं माना जाए। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने आश्वासन के मुताबिक जल्द कार्रवाई नहीं की, तो दोबारा धरना शुरू किया जाएगा।
देवव्रत धामा बोले- न्याय नहीं मिला तो फिर शुरू होगा आंदोलन
देवव्रत धामा ने कहा कि प्रशासन को स्पष्ट संदेश दिया गया है कि आश्वासन के बाद धरना स्थगित किया गया है, संघर्ष समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ित महिलाओं को जल्द न्याय नहीं मिला तो आंदोलन फिर शुरू किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल किसी एक व्यक्ति या परिवार की नहीं है, बल्कि महिलाओं के सम्मान, कानून के राज और कश्यप समाज को न्याय दिलाने से जुड़ी है।

धरने में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों के लोग पहुंचे
धरने में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता सुरेंद्र त्यागी, निवाड़ी नगर अध्यक्ष अजय पंडित, फरीदनगर नगर अध्यक्ष वाहिद कुरैशी, पतला नगर अध्यक्ष फारुख मलिक, सालिम तोमर, विधानसभा उपाध्यक्ष राजेश जाटव, पूर्व नगर अध्यक्ष समाजवादी युवजन सभा दीनू खान सहित कई कार्यकर्ता मौजूद रहे।
इसके अलावा शहर अध्यक्ष कांग्रेस मोदीनगर बृजेश कुमार सेन, महिला कांग्रेस अध्यक्ष कल्पना सिंह, सुनील कटारिया, कामेश शर्मा, आत्म प्रकाश शर्मा, महेश दत्त शर्मा, मुकुल शर्मा, चंद्रवीर सिंह ब्लॉक अध्यक्ष और सभासद संघर्ष समिति के अध्यक्ष वेदप्रकाश चौधरी समेत कई सभासद भी धरने में शामिल हुए।
सामाजिक संगठनों की ओर से ऑल इंडिया एंटी करप्शन एंटी ह्यूमन राइट के अध्यक्ष लक्की कश्यप, संजय कश्यप, राजेंद्र कश्यप, संदीप गर्ग, दिग्विजय कश्यप, प्रदीप कश्यप, पंकज कश्यप, पुष्पेंद्र दहिया, चतरे जाटव और फकीरचंद कश्यप सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता एवं स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
आंदोलनकारियों ने क्या कहा?
आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई का आश्वासन मिलने के बाद फिलहाल धरना स्थगित किया गया है। अब पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई पर नजर रहेगी। यदि मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को दोबारा शुरू किया जाएगा।


