गाजियाबाद के साहिबाबाद स्तिथ शालीमार गार्डन में UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) से जुड़े कानून के विरोध का मामला अब सियासी और प्रशासनिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है। छात्र हितों को लेकर आवाज़ उठाने पर भारतीय जनता पार्टी के पूर्व मंडल अध्यक्ष हरीश गौड को पुलिस ने करीब 21 घंटे तक नज़रबंद रखा। इस कार्रवाई के बाद मंडल अध्यक्ष ने अपना दर्द और विरोध सोशल मीडिया पोस्ट के ज़रिये सार्वजनिक किया है, जो अब तेजी से वायरल हो रही है।
हरीश गौड ने सोशल मीडिया पोस्ट में साफ शब्दों में लिखा कि 21 घंटे का हाउस अरेस्ट उनकी आवाज़ को दबा नहीं सका, बल्कि उनके हौसले और मज़बूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि यदि छात्र हितों की बात करना अपराध है, तो वे यह “अपराध आख़िरी सांस तक करते रहेंगे।”

हरीश गौड ने UGC जैसे गंभीर विषय पर सरकार से भावनात्मक नहीं, बल्कि जिम्मेदार और सचेत रवैये की अपेक्षा जताई। उन्होंने लिखा कि इस कानून पर दोबारा मंथन होना चाहिए, मजबूरी में नहीं बल्कि ज़िम्मेदारी के तहत।
पोस्ट में उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी के प्रति उनकी आस्था पहले भी अडिग थी, आज भी है और भविष्य में भी रहेगी। लेकिन साथ ही उन्होंने यह भी संदेश दे डाला कि आस्था का मतलब चुप रहना नहीं होता और निष्ठा का अर्थ अन्याय को स्वीकार करना नहीं है।
हरीश गौड ने दो टूक कहा,
“हम न झुके हैं, न झुकेंगे। संघर्ष जारी है… और जारी रहेगा।”
सूत्रों के मुताबिक, गाजियाबाद में छात्र संगठनों और कुछ स्थानीय कार्यकर्ताओं द्वारा UGC कानून को लेकर विरोध की संभावना को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने एहतियातन यह कदम उठाया। हालांकि, अब मंडल अध्यक्ष की इस सार्वजनिक प्रतिक्रिया के बाद मामला और अधिक तूल पकड़ता नजर आ रहा है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में भाजपा के भीतर भी छात्र नीति और UGC से जुड़े मुद्दों पर बहस को तेज कर सकती है। फिलहाल सोशल मीडिया पर यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।


